हरियाणा पुलिस में रुपये लेकर फर्जी तरीके से भर्ती करवाने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। हरियाणा, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें मुख्य आरोपी राजस्थान के सिगड़ा निवासी नरेश भी है। पुलिस ने इनके पास से 13 लाख 50 हजार रुपये नकद, आठ तोला सोना और तीन गाड़ियां बरामद करने के साथ नौ बैंक खातों को भी सीज करवाया है।
नारनौल पुलिस ने 15 अप्रैल से 7 मई तक विभिन्न प्रदेशों से आरोपियों की गिरफ्तारी की। मुख्य आरोपी नरेश वर्ष 2008 में नेवी में सिपाही लगा था, लेकिन पांच दिन में ही नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद वर्ष 2012 में आईटीबीपी में बतौर हेड कांस्टेबल लगा। वर्ष 2013 में उसने फिर नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद आरोपी ने वर्ष 2018 तक निजी स्कूलों में पढ़ाया।
महेंद्रगढ़ के सदर थाने में गांव सूरजनवास निवासी धर्मबीर की शिकायत पर मुकदमा दर्ज करते हुए पुलिस ने जांच शुरू की तो गिरोह के कई राज्यों से तार जुड़ते चले गए। रोहतक की सांगवान एकेडमी, दीक्षा एकेडमी, विजेता एकेडमी, भास्कर एकेडमी, गुरुकुल एकेडमी चरखी दादरी, राजस्थान की शेखावटी एकेडमी सिंघाना और यूएसए डिफेंस एकेडमी बड़ी पचेरी के संचालकों को गिरफ्तार किया गया है।
शिकायतकर्ता धर्मबीर ने बताया कि उनकी मुलाकात राजस्थान के सिगड़ा निवासी नरेश से 2021 में हुई थी और नरेश सूरजनवास गांव में काफी लोगों के संपर्क में था। नरेश ने बताया कि वह पचेरी में यूएसए डिफेंस एकेडमी के नाम से कोचिंग सेंटर चलाता है और हरियाणा पुलिस में भर्ती का बैच शुरू करने जा रहा है। इसकी फीस तीन लाख रुपये है। इस पर वह झांसे में आ गया।
बैच में चयन नहीं होने पर हॉस्टल फीस काट कर रुपये वापस देने का दिया झांसा
धर्मबीर के बेटे ने भी हरियाणा पुलिस का फाॅर्म भर रखा था, जिसके बारे में बात करने पर नरेश ने तीन लाख रुपये एडवांस देने के लिए कहा और बताया कि अगर गारंटी बैच में चयन नहीं हुआ तो केवल हॉस्टल की आठ हजार रुपये प्रति महीना फीस काट कर रुपये वापस मिल जाएंगे। इस पर धर्मबीर ने उसे तीन लाख रुपये दे दिए। वहीं 5-7 दिन बाद बेटे को पचेरी हाॅस्टल में भेजने की बात कही। करीब 8-10 दिन बाद पूछताछ के लिए जब उसने नरेश के पास फोन किया कि बेटे को कब भेजना है तो उसने कहा कि आपको नौकरी से मतलब है, 15 लाख रुपये दे देना, सारा काम वह स्वयं करवा देगा और काम नहीं हुआ तो महीने के अंदर पैसे वापस कर देगा।
तीन बार में लिए 12 लाख रुपये
गिरोह के सरगना नरेश ने धर्मबीर को बताया कि बेटे को पेपर देने मत भेजना, उसकी जगह दूसरा बच्चा पेपर देगा और पेपर से पहले पांच लाख रुपये और देने होंगे। पेपर से दो दिन पहले आरोपी नरेश शिकायतकर्ता के पास गया और कहा कि पांच लाख अभी देने हैं। चार लाख रिजल्ट आने व बाकी के तीन लाख रुपये ज्वाइनिंग पर देने होंगे। शिकायतकर्ता ने उसी दिन पांच लाख रुपये नरेश को दे दिए। रिजल्ट आने के बाद बताया कि अब फिजिकल से पहले इनके अंगूठे और फोटो बदलवानी है। फिजिकल से तीन दिन पहले धर्मबीर के घर नरेश पहुंचा और चार लाख रुपये और देने के लिए कहा। उसने बताया कि बेटे को चंडीगढ़ लेकर जाएगा, वहां पर फॉर्म से फोटो और फिंगरप्रिंट बदलवा देगा। फिजिकल होने से दो दिन पहले धर्मबीर ने नरेश को चार लाख रुपये और दे दिए। धर्मबीर के बेटे को नरेश एक टैक्सी में बैठाकर चंडीगढ़ लेकर गया, जिसमें 5-7 बच्चे और भी थे।
रिजल्ट में नाम नहीं आया तब हुआ ठगी का अहसास
फिजिकल के रिजल्ट के बाद जब डॉक्युमेंट्स वेरिफिकेशन की तारीख आई तो नरेश ने शिकायतकर्ता से कहा कि बेटे को वेरिफिकेशन के लिए मत भेजना, अभी इनके फिंगर और फोटो नहीं बदले गए हैं। इन्हें बाद में वह अपने आप बदलवा देगा मगर बाद में नरेश ने कुछ भी नहीं करवाया। जब अंतिम परिणाम आया और धर्मबीर के बेटे का लिस्ट में नाम नहीं आया तब नरेश ने जवाब दिया कि एक महीने में उसके 12 लाख रुपये वापस कर देगा। 18 महीने बीतने के बाद भी नरेश ने केवल 1.50 लाख रुपये ही वापस किए तब धर्मबीर को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दी।
आरोपी नितिन डीसी कार्यालय पंचकूला में क्लर्क के पद पर कार्यरत
जुगल किशोर निवासी नीम गांव, थाना गोवर्धन मथुरा फिंगर प्रिंट बदलवाने का काम देखता था। राजेश निवासी मेघपुर थाना पचेरी की हरियाणा पुलिस भर्ती में फिंगर प्रिंट बदलने के संबंध में बात हुई थी। श्रीनिवास निवासी बेरी, झज्जर भर्ती के नाम पर पैसे दिलवाने वाले का काम करता था। आरोपी नितिन निवासी कलवाड़ी कनीना (महेंद्रगढ़) ने अभ्यर्थियों के फिंगर प्रिंट बदलवाने के पैसे लिए थे। वह डीसी कार्यालय पंचकूला में क्लर्क के पद पर कार्यरत है।
इन आरोपियों को किया गिरफ्तार
सूरजनवास निवासी विनोद, संजय और बृह्मदत्त, बलवान निवासी नया गांव थाना पचेरी, मुख्य आरोपी नरेश निवासी सीगड़ा, अवधेश निवासी जासावास, जितेंद्र उर्फ जीतू निवासी चिंडालिया, प्रवीण निवासी भालोठ थाना पचेरी, राजेश निवासी खांदवा थाना पचेरी, नरवीर निवासी ढाणी बायां वाली नांगल चौधरी, राजबीर निवासी भिटेड़ा थाना बहरोड़, योगेश निवासी गोदा का बास रघुवीरपुरा थाना सूरजगढ़, अजय निवासी खानपुरा थाना सामोद हाल आबाद निवारण रोड झोटवाड़ा, अमित निवासी खानपुरा थाना सामोद हाल आबाद निवारण रोड झोटवाड़ा और सुरेश निवासी गुजरवास थाना सिंघाना, बलवान निवासी मकड़ोली कलां थाना सदर रोहतक, प्रेमचंद निवासी खोरड़ा हाल वार्ड नंबर-16 रोहतक चौक चरखी दादरी, अनिल भास्कर निवासी नारायणपुर सुतिहार जिला छपरा, सरिता निवासी भैणी चंद्रपाल थाना महम हाल आबाद शास्त्री नगर रोहतक, दीपक निवासी बडराई थाना झोझू कलां, जगदीश निवासी तालु भिवानी, राकेश उर्फ पटेल निवासी पांची शेखपुर बिहार, प्रदीप निवासी भीलवाड़ा अटेली, पाल निवासी आरा थाना नवादा जिला भोजपुर, संदीप निवासी जसौर खेड़ी थाना सदर बहादुरगढ़ और हरविंद्र उर्फ हैप्पी वासी कबूलपुर रोहतक, सीमा निवासी शास्त्री नगर रोहतक, जुगल किशोर निवासी नीमगांव थाना गोवर्धन मथुरा, राजेश निवासी मेघपुर थाना पचेरी, श्रीनिवास निवासी बेरी, नितिन निवासी कलवाड़ी कनीना।
नारनौल पुलिस ने फर्जी तरीके से सरकारी विभागों में भर्ती करवाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इसमें विभिन्न राज्यों के कुल 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें कई एकेडमी संचालक भी शामिल हैं। मामले की जांच लगातार जारी है। इसमें शामिल अन्य आरोपियों की भी धरपकड़ जारी है।
- विक्रांत भूषण, पुलिस अधीक्षक नारनौल।