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गर्भ में पल रहे आठ माह के भ्रूण की मौत -परिजनों ने लगाया चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। गांव खोड़ निवासी एक गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे आठ माह के भ्रूण की मौत हो गई। इसकी चिकित्सकों ने डिलीवरी कर वीरवार को गर्भ से निकाला। वहीं चिकित्सकों ने इसे चिकित्सकों की लापरवाही करार देते हुए विरोध जताया तथा भ्रूण के पोस्टमार्टम कराने की मांग की। मगर चिकित्सकों ने जब पोस्टमार्टम नहीं किया तो परिजनों ने उसे मिट्टी दे दी।
गांव खोड़ निवासी विशाल ने बताया कि उसकी पत्नी सोनू गर्भवती थी। उन्होंने नौ जुलाई को नागरिक अस्पताल में पत्नी का चेकअप कराया। तब उसकी पत्नी के पेट में दर्द हो रहा था। इस पर चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही। मगर उस दिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया। जिस पर चिकित्सक ने उनकी पत्नी को खून बढ़ाने वाला इंजेक्शन लगा दिया। इसके बाद वे उसे लेकर अटेली चले गए। मगर जब दर्द तेज हुआ तो वे फिर 17 जुलाई को नागरिक अस्पताल में आये। तब फिर चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बोला, मगर उस दिन भी नंबर नहीं आया और नागरिक अस्पताल के अल्ट्रासाउंड संचालक ने बाद में आने की बात कही। इस पर किसी तरह रिक्वेस्ट कर अल्ट्रासाउंड करा दिया।
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जब वे अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट लेकर गए तो उन्हें डॉ. नहीं मिली। इसके बाद वे अटेली चले गए। जहां रिपोर्ट दिखाई तो बताया कि गर्भ में पल रहे भ्रूण की मौत हो चुकी है। इस पर वह 18 जुलाई को अपनी गर्भवती महिला को लेकर नारनौल के नागरिक अस्पताल में आ गया। यहां चिकित्सकों को बताया तो उन्होंने उसकी पत्नी को दाखिल कर लिया, मगर बेड नहीं दिया। इसके कारण वीरवार को स्ट्रेचर पर बैठे-बैठे ही मरे हुए शिशु की डिलीवरी हो गई। तब उन्होंने चिकित्सकों से गुहार लगाई तो उसकी पत्नी को अंदर बेड पर ले जाया गया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि गर्भ में पल रहे भ्रूण की मौत चिकित्सकों की लापरवाही के कारण हुई है। पीड़ित ने चिकित्सकों से भ्रूण का पोस्टमार्टम कराने की मांग भी की, मगर काफी देर तक जब पोस्टमार्टम नहीं किया गया तो परिजनों ने भ्रूण को मिट्टी दे दी।
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