फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डिलीवरी में गड़बड़ हुई तो आप ही होंगे जिम्मेवार

विज्ञापन
विज्ञापन
डिलीवरी में गड़बड़ हुई तो आप ही होंगे जिम्मेदार
विज्ञापन

नारनौल। जिले का नागरिक अस्पताल राम भरोसे चल रहा है। चिकित्सकों की कमी के कारण अस्पताल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षित मातृत्व अभियान को भी झटका लग रहा है। अस्पताल में डिलीवरी के लिए आने वाली महिला मरीजों से यह लिखवाया जा रहा है कि अस्पताल में चिकित्सक नहीं हैं। अगर डिलीवरी में कुछ गड़बड़ी हुई तो उसके जिम्मेदार आप खुद होंगे।
जिला स्तरीय नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के 42 पद हैं। जिनमें से केवल 18 चिकित्सक ही अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। शेष पद कई दिनों से रिक्त हैं। जिसके कारण अस्पताल में ओपीडी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही है। सबसे ज्यादा बुरा हाल गायनी वार्ड का हो रहा है। यहां पर चिकित्सकों के अभाव में मरीजों को राम भरोसे छोड़ दिया जा रहा है। वहीं लोगों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय के नागरिक अस्पताल का ही यही हाल है तो अन्य सामुदायिक व अन्य केंद्रों का हाल क्या होगा।
विज्ञापन

लिखकर ही भर्ती करते महिलाओं को
नागरिक अस्पताल में दिलचस्प बात यह सामने आई है कि यहां डिलीवरी के लिए आने वाली महिला मरीजों को अपनी मर्जी व अपने रिस्क पर अस्पताल में भर्ती होने संबंधी लिखवाया जाता है। जिसके बाद ही वहां पर तैनात नर्स महिलाओं को भर्ती करती हैं। नागरिक अस्पताल में डिलीवरी के लिए एक दिन में औसतन 20 से 25 महिलाएं आती हैं। वहीं एक माह में करीब 90 बच्चे ऑपरेशन द्वारा पैदा होते हैं।
आठ दिन से बनी स्थिति ज्यादा खराब
नागरिक अस्पताल की गायनी वार्ड में आठ दिन से चिकित्सकों के लंबी छुट्टी पर चले जाने के कारण हालात बिगड़े हुए हैं। गायनी वार्ड की डॉ. निशीपाल, डॉ. आकांक्षा, डा. रश्मी और डॉ. अंजली लंबी छुट्टी पर चल रही हैं। डा. अंजली ने तो शनिवार को ज्वाइन कर लिया, मगर अन्य तीन सितंबर के अंत तक अवकाश पर हैं। जिनके बाद केवल तीन चिकित्सक डा. वृतिका, डा. प्रेमलता व डा. योगेश के ही हवाले पूरा गायनी वार्ड है। ऐसे में तीन चिकित्सक इस वार्ड को नहीं संभाल पा रहे हैं।
एमएस सर्जन, फिर भी निजी को बुला रहे
नागरिक अस्पताल में गायनी वार्ड में सर्जन हैं फिर भी ऑपरेशन के लिए निजी चिकित्सक की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं। निजी चिकित्सक बुलाने के लिए एक ऑपरेशन के 3500 रुपये सरकार की ओर से दिए जाते हैं। महीने में निजी चिकित्सक करीब 90 ऑपरेशन कर रहे हैं।
कोई ट्रांसफर करवा तो कोई छोड़ कर जा रहा
अगस्त में चार चिकित्सक अपना तबादला करा जिले से बाहर चले गए। वहीं पांच चिकित्सकों ने नागरिक अस्पताल से तबादला करा लिया। यहां से बाहर जाने वाले डा. जगबीर सर्जन, डा. विकास वर्मा सर्जन, डा. विनोद कंबोज हड्डी रोग विशेषज्ञ तथा डा. अमर कुमार शामिल हैं। इन लोगों ने जून में ज्वाइन किया था तथा अगस्त में जिले से बाहर चले गए। वहीं पांच चिकित्सक डा. योगेश, डा. जयप्रकाश, डा. मोनिका यादव, डा. स्वाती यादव व डा. अंकित जिला के अन्य अस्पतालों में ट्रांसफर करवा चले गए।
विज्ञापन

एसएनसीयू वार्ड में भी हालत खराब
नागरिक अस्पताल में स्थापित प्रदेश के पहले एसएनसीयू वार्ड की हालत भी खराब है। न्यू बेबी बोर्न के लिए बनाये गए इस वार्ड में अब कोई चिकित्सक नहीं है। जिसके कारण यहां नवजात बच्चों को नहीं रखा जा रहा है।
जिले में चिकित्सकों की कमी है। जिसके कारण अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसके लिए उच्चाधिकारियों को लिखा हुआ है।
-डॉ. राजेश कुमार, कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल नारनौल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें