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डिलीवरी के दौरान महिला समेत नौ माह के भ्रूण की मौत

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। जिला नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिला की नौ माह के भ्रूण के साथ उपचार के दौरान संदिग्ध हालत में बुधवार की रात मौत हो गई। इस पर नाराज परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और डॉक्टरों से हाथापाई तक हो गई। हंगामे की सूचना मिलते ही अस्पताल चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को शांत कराया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से महिला और भ्रूण की मौत हुई है। इसे लेकर परिजनों ने पुलिस और सीएमओ को शिकायत देकर आरोपी डॉक्टरों पर कार्रवाई करने की मांग की। पुलिस ने शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया और अज्ञात डॉक्टर समेत अन्य पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
ग्राम काकड़ा जिला झुंझुनू राजस्थान विक्रम सिंह ने बताया कि वह एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) में हेड क्लर्क के पद पर श्रीनगर में तैनात है। उसकी पत्नी ललिता देवी (27) को 21 नवंबर की शाम पांच बजे नारनौल नागरिक अस्पताल के जच्चा बच्चा वार्ड में भर्ती करवाया था। रात करीब साढे़ आठ बजे डॉक्टर ने उसे एक टेबलेट व इंजेक्शन दिया था। जिसके बाद रात करीब 10 बजे ललिता की हालत खराब हो गई। असहनीय दर्द होने के कारण वह परेशान हो गई लेकिन डॉक्टरों ने उसे देखने की जहमत नहीं उठाई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसने मौके पर तैनात एक महिला डॉक्टर से कई बार आग्रह किया लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया। पीड़ित ने बताया कि रात करीब डेढ़ बजे उसकी पत्नी ने दम तोड़ दिया। आरोप लगाया कि ललिता का चेकअप करने के लिए आए डॉक्टरों ने उसको निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी गर्भवती पत्नी और भ्रूण की मौत हुई है। मृतका के रिश्तेदार लक्ष्मण सिंह ने बताया कि इस अप्रिय घटना का जिम्मेदार अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ सदस्य हैं।
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डॉक्टरों और स्टाफ पर केस दर्ज
अस्पताल चौकी प्रभारी महेश कुमार ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों व अन्य स्टाफ सदस्यों पर लापरवाही बरतने का केस दर्ज कर किया गया है। अस्पताल प्रबंधन से ड्यूटी रजिस्टर लिया जाएगा। इसके बाद मामले में पूछताछ होगी। डॉक्टरों की टीम द्वारा शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

नौ माह का लड़का था गर्भ में
विक्रम सिंह ने बताया कि वह अपनी गर्भवती पत्नी ललिता को नौ माह पूरे होने पर डिलिवरी के लिए सरकारी अस्पताल लेकर आया था। ललिता घर से सकुशल आई थी और वार्ड में भी ठीक थी। रात को अचानक उसकी हालत बिगड़ गई, सांस फूलने लगी और मुंह से झाग निकलने लगे। डॉक्टरों को इसकी जानकारी दी, लेकिन किसी ने उसकी पत्नी के इलाज पर ध्यान नहीं दिया। जिससे उसकी पत्नी और भ्रूण की मौत हो गई। अस्पताल सूत्रों के अनुुसार महिला के पेट में लड़के का भ्रूण था।

डॉक्टरों की कमी
नागरिक अस्पताल में कुल पांच महिला डॉक्टर है। उन्होंने दिन में ओपीडी और गायनी वार्ड को भी उन्हें देखना होता है। विभाग अनुसार तीन नियमित और दो डेपुटेशन पर डॉक्टर अस्पताल में तैनात है। ऐसे में डॉक्टरों पर वर्क लोड रहता है। सरकारी अस्पताल में हर माह करीब 150 से 200 सिजेरियन डिलिवरी होती है। ऐसे में कई बार गर्भवती महिलाओं को परेशानी होती है।

पहले भी हो चुकी हैं मौतें
सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान महिला की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। 16 अक्तूबर को नागरिक अस्पताल में डिलीवरी के बाद अचानक तबियत बिगड़ने से 22 वर्षीया प्रसूता की मौत हो गई थी। परिजनों ने प्रसूता की मौत के लिए ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक को जिम्मेदार ठहराते हुए अस्पताल में हंगामा किया था। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया था। इसके अलावा एक बच्चे की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस साल अस्पताल में उपचार में लापरवाही बरतने पर तीन डॉक्टरों पर केस दर्ज हो चुके हैं।
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बेड पर हो गई दो डिलिवरी
बुधवार की रात जच्चा-बच्चा वार्ड में दो महिलाओं की बेड पर ही डिलीवरी हो गई। परिजनों ने उसे डॉक्टरों की लापरवाही बताया। वार्ड में भर्ती पूजा देवी की जेठानी मंजू देवी ने बताया कि वह डॉक्टर के पास कई बार गई लेकिन डॉक्टर ने कहा कि अभी पूजा को कुछ नहीं होगा। उसके पश्चात पूजा की बेड पर ही डिलिवरी हो गई और लड़के को जन्म दिया। जब दोबारा जाकर डॉक्टर से डिलिवरी होने की बात बताई तो डॉक्टर ने कहा इसमें कौन सी बड़ी बात है, लड़का हो गया तो हो गया। वहीं, मुकेश देवी के पति शशि पाल ने बताया कि उसने अपनी पत्नी को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। परंतु डॉक्टरों की लापरवाही के चलते बेड पर ही डिलिवरी हो गई।
वर्जन
गर्भवती महिला की मौत के मामले में तीन डॉक्टरों की टीम जांच करेगी। इसके बाद संबंधित डॉक्टर व स्टाफ पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. इंद्रजीत धनखड़, सीएमओ।
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