मंडी अटेली। क्षेत्र के विभिन्न गांवों की आबादी को देखते हुए लगाए गए सफाई कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है। इससे गांवों में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है।
दूषित पानी और कूड़े-करकट से नालियां अटी पड़ी हैं। इससे न केवल दुर्गंध पैदा हो रही है बल्कि गर्मी के मौसम की शुरुआत पर मक्खी-मच्छर इत्यादि का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। सरकार के मापदंड के अनुसार 1500 की आबादी वाले गांव में एक सफाई कर्मचारी तैनात किया हुआ है। 2500 की आबादी वाले गांव में दो कर्मचारियों को लगाया गया है, लेकिन गांव कांटी, खेड़ी, बिहाली, बाछौद, सागरपुर आदि 5000 की आबादी के गांव है। इनमें मात्र दो ही सफाई कर्मचारी लगे हुए हैं। ऐसे में गांव की सफाई पूरी तरह से नहीं हो पा रही है।
अटेली नांगल खंड के अंतर्गत 43 गांव लगते हैं जिनमें 68 सफाई कर्मचारी तैनात हैं। गांवों की आबादी को देखते हुए सफाई कर्मचारी सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाने में असफल साबित हो रहें हैं। गत वर्ष प्रशासन की ओर से घर-घर कूड़ा करकट उठाने के लिए ट्रैक्टर ट्राली लगाई हुई थी, लेकिन उनकी अनियमितताओं के कारण ग्राम पंचायत उनसे संतुष्ट नहीं थी। क्षेत्र के नागरिकों ने सरकार व प्रशासन से सफाई कर्मचारियों की संख्या आबादी के हिसाब से बढ़ाने की मांग की है ताकि गांवों को स्वच्छ रखा जा सके।