महेंद्रगढ़। वर्तमान में मोबाइल फोन का अत्यधिक प्रयोग विद्यार्थियों को मानसिक रोगी बना रहा है। पिछले पांच साल में मोबाइल फोन के बढ़ते प्रयोग के कारण अब इसका असर धीरे-धीरे विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर दिखने लगा है। साथ ही मोबाइल फोन का प्रयोग लगातार घरेलू हिंसा को भी बढ़ावा दे रहा है। वहीं मोबाइल फोन के अधिक प्रयोग से बच्चे तनाव में भी आ रहे हैं।
अगर सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर निगरानी नहीं रखी गई तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर होने वाली ओवर शेयरिंग से बच्चों के हैकर्स का निशाना बनने की आशंका ज्यादा रहती है। इससे साइबर अपराध भी होते हैं, जो बच्चों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है। सोशल मीडिया से विद्यार्थियों की बढ़ती नजदीकियां सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर कर रही हैं। मोबाइल फोन के अधिक प्रयोग ने बच्चों को धीरे-धीरे समाज से दूर कर दिया है।
हाल ही में उम्मीद काउंसिलिंग सेंटर (डायट) जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान महेंद्रगढ़ द्वारा जिले के स्कूलों में सर्वेक्षण किया गया। इसमें चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। अधिकतर विद्यार्थी भी इसके नकारात्मक प्रभावों को खुलकर बता रहे हैं। इसी वर्ष अक्तूबर के दौरान किए गए सर्वेक्षण में कक्षा छठी से आठवीं और नौवीं से 12वीं तक के कुल 260 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। कक्षा 6 से 8 तक के 29.16 प्रतिशत विद्यार्थियों ने सकारात्मक प्रभाव दर्शाया, जबकि 70.83 प्रतिशत बच्चों ने नकारात्मक प्रभावों को माना है। वहीं कक्षा 9 से 12 तक के 36.66 प्रतिशत बच्चों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जबकि 63.33 प्रतिशत ने नकारात्मक मानते हुए शिक्षण अधिगम स्तर के लिए बाधक बताया। (संवाद)
प्रथम वर्ग के 29.16, द्वितीय वर्ग के 36.33 प्रतिशत विद्यार्थियों ने बताया सकारात्मक
इस सर्वेक्षण में शामिल छठी से आठवीं तक के प्रथम वर्ग में 29.16 प्रतिशत और कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 36.66 फीसदी ने मोबाइल फोन के प्रयोग को सकारात्मक बताया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जिंदगी बेहद आसान हुई है। एक छात्र के लिए सोशल मीडिया बहुत आवश्यक है, क्योंकि यह उनके लिए किसी जानकारी तक पहुंचना, साझा करना, शिक्षकों से जुड़ना आसान बनाता है। आपातकाल में मोबाइल फोन हमें संबंधित लोगों तक पहुंचने और आवश्यक सहायता प्राप्त करने में मदद करता है।
यह आए नकारात्मक तथ्य सामने
दोनों ही वर्गाें के अधिकतर विद्यार्थियों का मानना है कि मोबाइल फोन की लत सेहत को कई तरह के नुकसान भी पहुंचा रही है। इससे वह अवसाद, अकेलेपन और तनाव की ओर जा रहे हैं। बाल अपराधों में तेजी से वृद्धि हो रही है। भ्रामकता भी तेजी से प्रभावित कर रही है। इससे धोखाधड़ी भी बढ़ गई है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है।
सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान दोनों हैं, लेकिन यह सब उपयोगकर्ता पर निर्भर करता है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से अपने शैक्षणिक प्रदर्शन, दिनचर्या और सोशल मीडिया के बीच संतुलन बनाना चाहिए। किसी भी चीज का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हानिकारक होता है और यही बात सोशल मीडिया पर भी लागू होती है। सही संतुलन के साथ एक संतोषजनक जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। मोबाइल फोन का प्रयोग हमेशा अभिभावकों की निगरानी में ही आवश्यकता के अनुसार किया जाना बेहतर है।
- सूर्यकांत यादव, मनौवैज्ञानिक, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, महेंद्रगढ़।