संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा रविवार को प्राकृतिक खेती विषय पर किसान मेले का आयोजन किया गया। मेले में जिलाभर से 800 किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती की बारीकियां सीखी।
कार्यक्रम में मुख्यातिथि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय व गुरु जंभेशवर विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रो. बलदेव राज कांबोज रहे। अध्यक्षता डॉ. बलवान सिंह मंडल विस्तार शिक्षा निदेशक ने की। प्रो. बलदेव राज कांबोज ने कहा कि प्राकृतिक खेती समय की मांग है। प्राकृतिक खेती का उद्देश्य श्रम, मृदा, उपकरण जैसे उत्पादन कारकों को अधिकतम करके और उर्वरकों, हर्बीसाइड और कीटनाशकों जैसे गैर प्राकृतिक इनपुटों का उपयोग न करते हुए पैदावार बढ़ाना है। डॉ. कांबोज ने कहा देश की आजादी के बाद हमारा मुख्य प्रयास लोगों को खाद्यान्न सुरक्षा प्रदान करने के लिए खाद्यान्नों का उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित रहा। देश ने 1960-70 के दशक में हरित क्रांति लाकर इसे प्राप्त करने में भी सफलता हासिल की। इसके परिणामस्वरूप खेती में रसायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों आदि रसायनों का प्रयोग बहुत ज्यादा बढ़ गया। आज स्थिति ऐसी बन गई है कि इन जहरीले रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से यह भूमि, जल व पर्यावरण में घुलने के साथ खाद्य श्रृंखला, फूड चेन, में प्रवेश कर गए हैं जो मानव जाति में गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं। कृषि उत्पादों की गुणवत्ता के आधार पर किसान अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन्हें बेचकर अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं। सरकार ने खरीफ 2022 में यूरिया, डीएपी, एमओपी व एनपीके पर करीब 61 हजार करोड़ की सब्सिडी किसानों को दी है। कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ के जिला विस्तार विशेषज्ञ सस्य विज्ञान डॉ. आशीष शिवरान, केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. रमेश यादव ने किसानों को जानकारी दी। किसान मेले में जिला के प्रगतिशील किसान को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में किए गए बेहतर कार्यों के लिए प्रमाण पत्र व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। मेले के दौरान किसान विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। गांव बवानियां के स्वयं सहायता समुह की महिलाओं ने कुलपति को बाजरे से बने विभिन्न व्यंजनों का जायका भी चखाया। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण, डेयरी पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कृभको, बागवानी, मछली पालन विभाग व इफको के अधिकारियों ने संबंधित विभागों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में किसानों को विस्तार से जानकारी दी। इस मेले में केंद्र के वैज्ञानिकों डॉ. अशोक ढिल्लो, डॉ. राजपाल यादव, डॉ. आशीष शिवरान, डॉ. पूनम यादव आदि शामिल रहे।
प्राकृतिक खेती से यह होंगे फायदे
विशेषज्ञाें ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर हम उच्च गुणवत्ता युक्त फसल भूमि सुधार, जल संरक्षण, ग्रीन हाऊस गैसों का कम उत्सर्जन के साथ साथ सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी कम कर सकते हैं। प्रत्येक किसान को आधा एकड़ से शुरूआत करने का प्रण लेना है तथा तकनीकी ज्ञान के लिए नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र का सहयोग लेना चाहिये। भारत में एक सदी पहले तक मोटे अनाजों का प्रयोग ही आम जन करते थे। लेकिन हरित क्रांति के बाद गेहूं और धान के उत्पादन में हुई अभूतपूर्व बढ़ोतरी के चलते मोटे अनाज लोगों की थाली से गायब हो चुके हैं। जिसे वापस थाली का हिस्सा बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रयासरत है।
मोटा अनाज रोग प्रति रोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक:
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने कहा कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा के प्रत्येक जिला के कृषि विज्ञान केंद्र पर एक हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन लगाए हैं। श्री अन्न में गेहूं, चावल की तुलना में प्रोटीन, वसा, खनिज तत्त्व, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, ऊर्जा कैलोरी, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, फोलिक ऐसिड, जिंक तथा एमिनो एसिड आदि की भरपूर मात्रा होती है। कई रिसर्च में दावा किया गया है कि मिलेट का कुछ मात्रा में नियमित सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है और तमाम बीमारियों के खतरों को भी दूर किया जा सकता है।