फोटो संख्या:71- सब्जी मंडी में स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में सजावट करते श्रद्धालु-स्रोत--संव
महेंद्रगढ़। चैत्र नवरात्र आज से शुरू हो रहे हैं। माता भूरा भवानी मंदिर सिसोठ, प्राचीन दुर्गा मंदिर, मोदाश्रम मंदिर में सजावट की गई है। नवरात्र पर श्रद्धालु घर और मंदिरों में माता की चौकी की स्थापना की जाएगी। नवमी के दिन गांव सिसोठ स्थित माता भूरा भवानी मंंदिर में प्रसिद्ध मेला लगेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि मंगलवार को नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैल का अर्थ है हिमालय और पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। पार्वती के रूप में इन्हें भगवान शंकर की पत्नी के रूप में भी जाना जाता है। वृषभ (बैल) इनका वाहन होने के कारण इन्हें वृष भारूढा के नाम से भी जाना जाता है। इनके दाएं हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में इन्होंने कमल धारण किया हुआ है।
इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने के लिए ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान करें। पूजा घर की साफ-सफाई करें। शुभ मुहूर्त के अनुसार घटस्थापना करें और जौ बोएं। कलश पर नारियल रखें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माता की प्रतिमा स्थापित करें। देसी घी का दीपक जलाकर मां शैलपुत्री को कुमकुम, सफेद चंदन, हल्दी, अक्षत, सिंदूर, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, फल, मिठाई, नारियल 16 श्रृंगार का सामान अर्पित करें। गाय के घी से बने मिष्ठान का भोग लगाएं। उन्होंने बताया कि इस दिन शैलपुत्री माता की कथा, दुर्गा चालिसा, दुर्गा स्तुति या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। अगर आपको कोई मंत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं आता है तो ऊं ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम: तथा ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे नवार्ण मंत्र का जप कर सकते हैं।
फोटो संख्या:71- सब्जी मंडी में स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में सजावट करते श्रद्धालु-स्रोत--संव