सतनाली रेस्ट हाउस में उगी गाजर घास।
सतनाली। सतनाली व आसपास के क्षेत्र में विभिन्न संस्थानों खासकर मैदानों में उगी गाजर घास बीमारियों को न्योता दे रही है। यह केवल मनुष्य के लिए घातक नहीं बल्कि पशुओं-पक्षियों के लिए भी हानिकारक है। शरीर में सांस द्वारा जाकर यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है। विभिन्न खरपतवार नाशक रसायनों के प्रयोग द्वारा प्राचीन लाभकारी पौधों, फल, प्याजी, बथुआ इत्यादि को तो नष्ट कर सकते हैं लेकिन गाजर घास को नष्ट करने का कोई विकल्प भी लोगों को दिखाई दे रहा है। ग्रामीण प्रवीण वालिया, रवि वालिया, रामलाल, राहुल सहित अन्य युवाओं ने बताया कि अगर यह इसी गति से बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे खेतों में फसलों के स्थान पर केवल गाजर घास ही दिखाई देगी। मनुष्य व पशु बीमारी से ग्रस्त होंगे। क्षेत्र के सरकारी भवनों, कार्यालयों की खुली भूमि पर रकबा दिन- प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। क्षेत्र का ऐसा कोई कोना नहीं होगा जहां घास ने अपने पाव न पसारे हों, सड़क के किनारों से लेकर सरकारी भवनों तक गाजर उगी है। इसे जितना के प्रयास किए जाते हैं उतना ही यह उग्र रूप धारण करती जा रही है। सतनाली में मार्केट कमेटी विश्राम गृह, रेलवे स्टेशन, स्कूल स्टेडियम क्षेत्र में घास काफी फैल चुकी है। लोगों की मांग है कि सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर इसे उखाड़कर खत्म किया जाए। वहीं उन्होंने क्षेत्र के लोगों से आह्वान किया है कि सभी सके प्रयासों से इस समस्य से निजात पाई जा सकती है।