फोटो संख्या:59- गांव खायरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर पूजन करते श्रद्धालु---स्रो
महेंद्रगढ़। गांव खायरा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व शुक्रवार सुबह गांव में कलश यात्रा निकाली गई। इसमें 101 महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर गांव के मुख्य मार्गों से यात्रा निकाली।
कथा के प्रथम दिन पंडित कुलदीप भारद्वाज ने कहा कि जन्म-जन्मांतर व युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है, तब ऐसा अनुष्ठान होता है उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा एक अमर कथा है, इसे सुनने से पापी भी पाप मुक्त हो जाते हैं। वेदों का सार युगों-युगों से मानवजाति तक पहुंचाता रहा है। भागवत पुराण उसी सनातन ज्ञान की परंपरा में निरंतरता बनाए है, जो वेदों से प्रवाहित होती चली आई है। इसलिए भागवत महापुराण को वेदों का सार कहा गया है। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के बारे में बताया कि सबसे पहले शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाई थी, उन्हें सात दिनों के अंदर तक्षक के दंश से मृत्यु का श्राप मिला था। श्रीमद्भागवत कथा अमृत पान करने से संपूर्ण पापों का नाश होता है। इस अवसर पर सावरराम जांगिड़ मुख्य यजमान, महावीर प्रसाद, सत्यवीर सरपंच, रामपाल यादव, सोमदत्त यादव, लालाराम यादव, अरविंद नंबरदार, पुरषोत्तम शर्मा मौजूद रहे।