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Mahendragarh-Narnaul News: विश्व भाषा बनने से पूर्व हिंदी को देश की राजभाषा बनना जरूरी

Thu, 11 May 2023 01:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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नारनौल। विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा होने के बावजूद हिंदी अभी तक मात्र भारतीयों, प्रवासी भारतीयों और भारतवंशियों तक ही सीमित है। इसके वैश्विक विस्तार की बात आंशिक रूप से ही सही कही जा सकती है। यह कहना है विश्व बैंक, वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) की वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. अनुकृति का। वह मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा वैश्विक परिदृश्य में हिंदी की स्थिति विषय पर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में विचार गोष्ठी को संबोधित कर रही थी।
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उन्होंने कहा कि विश्व भाषा बनने से पूर्व हिंदी काे देश की राजभाषा बनना जरूरी है। विषय-प्रवर्तन करते हुए चीफ ट्रस्टी और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामनिवास मानव ने कहा कि राजकाज और कामकाज की भाषा बने बिना हिंदी का समुचित विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि घर में मान, तो बाहर सम्मान की कहावत हिंदी भाषा पर भी पूर्णतया चरितार्थ होती है। नवी मुंबई से वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. प्रियंका प्रसाद ने कहा कि स्वतंत्रता के पचहत्तर वर्ष बाद भी हम हिंदी को अपने देश की राजभाषा नहीं बना पाए हैं। ऐसे में हिंदी को विश्व भाषा बनाने की बात करना बेमानी है। प्रकाश कुमार प्रसाद ने स्पष्ट किया कि आज भारतीय डॉक्टर, वैज्ञानिक, इंजीनियर और आईटी प्रोफेशनल पूरे विश्व में छाये हुए हैं लेकिन उनके कार्य-व्यापार की भाषा अंग्रेजी है, हिंदी नहीं। भारतीय कौशल और व्यापार का माध्यम बनकर ही हिंदी सही अर्थ में विश्व भाषा बन सकती है। इस अवसर पर ट्रस्ट द्वारा अंगवस्त्र और सम्मान पत्र भेंट कर डॉ. प्रियंका प्रसाद को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर ट्रस्टी डॉ. कांता भारती, दलजीत गौतम और दीपक कुमार मौजूद रहे।
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