नारनौल। जिले में वायु प्रदूषण का स्तर हर दिन बढ़ता जा रहा है। अब तो आमजन के साथ सूर्य देव पर भी प्रदूषण का ग्रहण साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। जिला महेंद्रगढ़ की आबोहवा बहुत खराब स्थिति में पहुंच गई है। संपूर्ण इलाके में फिजाओं में जहर घुलने लगा है। पिछले एक सप्ताह से धीरे-धीरे संपूर्ण इलाके को प्रदूषण अपनी गिरफ्त में ले रहा है। सुबह से शाम तक स्मॉग की सफेद चादर के आगोश में संपूर्ण जिला महेंद्रगढ़ आ चुका है। शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 356 तक पहुंच गया था, जबकि रविवार को 377 वायु गुणवत्ता सूचकांक पर पहुंच गया है जो बेहद चिंताजनक और बहुत खराब स्थिति में पहुंच गया है। मौसम विशेषज्ञ और पर्यावरण विद डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि सितंबर और अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े की शुरुआत के बाद बारिश की गतिविधियां नहीं हुई है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उप्र में धान की पराली को लगातार जलाया जा रहा है, जिसकी वजह से प्रदूषित हवा, धुआं और हवा में धूल मिल गई। धुआं-धूल के कण आसमान में पहुंचे और हवा का दबाव कम होने के कारण कणों ने स्मॉग का रूप धारण कर लिया। उन्होंने कहा कि वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट होने के प्रमुख कारणों में तापमान में गिरावट, वायु का दबाव,अनियंत्रित यातायात के साधन, क्रशर जोन सड़कों का निर्माण, ईंट भट्ठे, अवैध ढंग से चल रहीं चिमनियां व मिक्सर प्लांट आबाेहवा को ओर जहरीली बना रहे हैं।
जिला में इस प्रकार रहा वायु गुणवत्ता सूचकांक
जिला महेंद्रगढ़ में शाम 4.50 बजे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक नारनौल में 377, नांगल चौधरी में 380, कनीना में 373, महेंद्रगढ़ में 375, अटेली में 371 और सतनाली में 352, रहा है। जिला महेंद्रगढ़ में धूल, धुआं, धुंध का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। आमजन के साथ सूर्य देव पर भी प्रदूषण का ग्रहण साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
नवंबर में 4 साल से 300 के पार पहुंच रहा एक्यूआई
जिले में नवंबर में वर्ष 2019 के बाद 300 के ऊपर वायु गुणवत्ता सूचकांक रहा है। अगर वर्ष 2019 के नवंबर की बात करें तो 380 सबसे अधिक एक्यूआई रहा था। वहीं 2020 के नवंबर में 350, 2021 के नवंबर में 377 और वर्ष 2022 के नवंबर माह में 343 के पास वायु गुणवत्ता सूचकांक रहा था। वहीं रविवार को भी 377 के पास एक्यूआई पहुंच गया है। ऐसे में आगामी दिनों में एक्यूआई के बढ़ने की संभावना बन रही है।