नारनौल। हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा समय-समय पर अनुसूचित जाति व पिछड़े वर्गों के आरक्षित कोटे में प्रथम व द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित पदों की भर्ती प्रक्रिया में भेदभाव कर नियमों की अवहेलना करने के मामले में विभिन्न संगठन सदस्यों ने महेंद्रगढ़ रोड स्थित संघर्ष समिति कार्यालय में बैठक की। इसकी अध्यक्षता सर्व अनुसूचित जाति संघर्ष समिति के प्रधान चंदन सिंह जालवान ने की। वहीं संचालन समिति के महासचिव बिरदी चंद गोठवाल ने किया।
बैठक में सर्व सहमति से संयुक्त हस्ताक्षर कर पत्र की प्रतियां राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव को भेजकर इस मामले में जांच कमेटी गठित करने, जांच कमेटी की रिपोर्ट मीडिया के समक्ष सार्वजनिक करने और मामले में संलिप्त दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
बिरदी चंद गोठवाल ने बताया कि गत 11 अक्तूबर को घोषित हरियाणा सिविल सेवा के अंतिम परिणाम में 61 पदों के लिए चयन किया गया है। जिसमें सामान्य वर्ग 44, अजा 06, पिछड़े वर्ग ए में 03 व बी में 01, आर्थिक पिछड़े वर्ग में 06 और ईएस एम में 01 शामिल है। यह भर्ती प्रक्रिया सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में खाली पड़े 100 पदों को भरने के लिए की गई थी, लेकिन इसमें मात्र 61 पदों पर ही चयन सूची जारी की गई। बाकी पदों को खाली छोड़ा गया। इस संबंध में आयोग द्वारा कोई उल्लेख नहीं किया गया। विडंबना का विषय है कि हरियाणा सरकार द्वारा घोषित किए गए उक्त परिणाम में अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्गों को उनके हक अधिकारों को दरकिनार करते हुए पूर्ण प्रतिनिधित्व देने से वंचित रखा गया है। हालांकि ग्रुप ए व बी के पदोन्नति में आरक्षण का जो प्रावधान किया गया है, उसके लिए सभी सामाजिक संगठन सरकार के आभारी हैं, परंतु आयोग के इस भेदभावपूर्ण रवैए से बहुजन समाज में रोष व्याप्त है। इस अवसर पर पूर्व तहसीलदार लालाराम नाहर, किशनलाल लुहानीवाल, जोगेंद्र जैदिया, बलबीर सिंह बबेरवाल, विनोद यादव, बिशन कुमार सैनी, शिवनारायण मोरवाल, धर्मवीर यादव, पतराम खिंची, पूर्व डीजीएम महेंद्र खन्ना, एडवोकेट भीम सिंह दहिया, राकेश कुमार, हरीराम महारानिया, जयपाल सिंह, लालचंद पनवाल, सुरेश कुमार व रोहताश बबेरवाल आदि मौजूद रहे।