फोटो 30जेएनडी09-अदालत परिसर में काम छोड़कर बैठे हुए अधिवक्ता। स्रोत अधिवक्ता
जींद। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के विरोध में जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने वीरवार को भी वर्क सस्पेंड रखा। इसको लेकर मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी और अधिकांश मामलों में अगली तारीख दे दी गई। अधिवक्ता भूपेंद्र देशवाल, सुशील वशिष्ठ, सुनील ने कहा कि न्याय प्रणाली का उद्देश्य निष्पक्ष न्याय देना है लेकिन पुलिस और अभियोजन पक्ष पर दोषसिद्धि दर बढ़ाने का दबाव रहता है। ऐसे में यदि आरोपी का बचाव करने वाला वकील भी सरकार का वेतनभोगी कर्मचारी होगा तो हितों का टकराव पैदा होगा और निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल उठेंगे। अधिवक्ता सुशील वशिष्ठ ने अजमल कसाब मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि मुफ्त कानूनी सहायता प्रणाली की व्यावहारिक चुनौतियां पहले भी सामने आ चुकी हैं। वहीं अधिवक्ता सुनील ने सुझाव दिया कि सरकार आयुष्मान भारत और आरटीई की तर्ज पर आरोपी को अपनी पसंद का स्वतंत्र वकील चुनने का अधिकार दे तथा उसकी फीस सीधे सरकारी कोष से अदा करे। अधिवक्ताओं ने मांग की कि सरकार लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम की खामियों को दूर कर न्याय व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष और प्रभावी बनाए।