नारनौल। जिले में अटल भूजल योजना के तहत स्टोरेज टैंक बनवाए जाएंगे। इन स्टोरेज टैंकों से किसान आसानी से रबी फसल की सिंचाई कर सकेंगे। सिंचाई विभाग ऐसे गांव चिह्नित कर स्टोरेज टैंक बना रहा है जहां पर अभी तक पानी नहीं पहुंचा है, ताकि जलस्तर में सुधार हो सके। अब अटल भूजल योजना के तहत धौलेड़ा, सैद अलीपुर, नांगल पीपा, कोरियावास, दौचाना में स्टोरेज टैंक बनाए जा रहे हैं। इसके लिए सिंचाई विभाग की ओर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इन स्टोरेज टैंक की लंबाई 134.12 मीटर, 120.10 चौड़ा और 4.60 मीटर गहरा किया जाएगा। सिंचाई इन स्टोरेज टैंक के बनते ही बरसात के सीजन में पानी स्टोरेज करेगा। इस स्टोरेज पानी से किसान रबी फसल को सिंचित कर सकेगा। इसके अलावा सिंचाई विभाग कच्ची नहर बनाकर नहरी पानी छोड़ रहा है, जिससे अनेक गांवों के जलस्तर में सुधार देखने को मिल रहा है।
14 करोड़ 15 लाख रुपये की लागत से बनेंगे 5 स्टोरेज टैंक
सिंचाई विभाग की तरफ से धौलेड़ा, कोरियावास, सैदअलीपुर, नांगल पीपा, दौचाना में 14 करोड़ 15 लाख 39 हजार 226 रुपये की लागत से बनाए जाएंगे। इन 5 स्टोरेज टैंकों को सिंचाई विभाग मानसून के सीजन से पहले बना दिया जाएगा। इसके अलावा तीन टैंक हरियाणा वाटर रिसोर्स अथॉरिटी स्कीम के तहत बीगोपुर, धानौता और बसीरपुर में भी बनाए जा रहे हैं। यह तीनों टैंक 11.50 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे हैं।
एक टैंक में 42.50 लाख लीटर होगा स्टोरेज
सिंचाई विभाग की तरफ से बनाए जा रहे प्रत्येक स्टोरेज टैंक की 42 लाख 50 हजार 138 लीटर पानी की क्षमता है। यह सुविधा 30 दिन तक मिल सकेगी। एक स्टोरेज टैंक से 250 से 300 एकड़ में किसान आसानी से सिंचाई कर सकेंगे। ऐसे में पांचों स्टोरेज टैंक बनने से 1250 से 1500 एकड़ में खड़ी फसल को समय पर पानी मिल सकेगा।
6 एकड़ में बनेगा एक टैंक
अटल भूजल योजना के तहत बन रहे पांचों टैंक करीब 6 एकड़ में बनेगे, जिससे भूजल स्तर में भी सुधार होगा। इस टैंक की लंबाई 134.10 मीटर, चौड़ाई 120.10 और स्टोरेज टैंक की गहराई 4.60 मीटर होगी। सिंचाई विभाग की ओर से धौलेड़ा, कोरियावास, सैदअलीपुर, नांगल पीपा, दौचाना में स्टोरेज टैंक बना रहा है। इसके अलावा बिगोपुर, धानौता और बसीरपुर में भी स्टोरेज टैंक बनाए जा रहे हैं।
अटल भूजल योजना के तहत 5 स्टोरेज टैंक बनाए जा रहे हैं, जिन पर करीब 14.15 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इन सभी टैंकों को बरसात के सीजन से पहले बना लिया जाएगा। जिसके बाद किसान रबी फसल में सिंचाई भी कर सकेंगे।
राजेश वर्मा, एसडीओ सिंचाई विभाग नारनौल।