फोटो नंबर-23नारनौल में एक दुकान से दीये खरीदता व्यक्ति। संवाद
नारनौल। दिवाली पर्व पर शहर के बाजारों में मिट्टी के दीये की दुकानें जगह-जगह सज गई हैं और इनके बनाने का कार्य भी तेजी से चल रहा है। इसको लेकर गत चार-पांच सालों से दीयों का अच्छा कारोबार हो रहा है।
दुकानदारों का कहना है कि जब से स्वदेशी आइटम लोग अपना रहे हैं तब से दिवाली पर उनके कारोबार में एक बार फिर से रौनक लौटी है। उन्होंने बताया कि गत चार-पांच साल पहले एक बार तो चाइनीज दीयों ने बाजार में अपना कब्जा कर लिया था। इसके कारण उनका काम कम हो गया था। शहर में फिलहाल करीब 40 कारीगरों द्वारा दीये बनाने का कार्य किया जा रहा है। यह कार्य मोहल्ला बड़का कुआं, नलापुर, पुरानी सराय तथा नई सराय आदि स्थानों पर प्रजापत समाज के लोगों द्वारा किया जा रहा है। गत वर्ष दिवाली की बात करें तो बाजार में सभी स्थानों से करीब 20 लाख दीयों की खरीद हुई थी।
25 लाख दीये किए जा रहे तैयार
इस बार भी करीब 25 लाख दीये तैयार किए जा रहे हैं। एक कारीगर द्वारा 50 हजार से एक लाख तक दीये बनाए जा रहे हैं। दिये बचने वालों के अनुसार गत वर्ष शहर में सभी स्थानों के मिलाकर करीब 20 लाख रुपये के दीये बेचे गए थे। इस बार और ज्यादा बिक्री की संभावना जताई जा रही है।
दिवाली पर्व को लेकर हमारे द्वारा एक लाख के करीब दीये बनाए जा रहे हैं। गत वर्ष दीये का कारोबार अच्छा रहा था। शहर में जितने भी लोग दीये बना रहे वह शहर में बिक्री के लिए हैं। हमारे यहां से दिये बाहर नहीं जाते आसपास गांव के लोग तो जरूर खरीद लेते हैं।
निरंजन प्रजापत।
शहर में करीब 40 स्थानों पर दीये बनाए जा रहे हैं। गत वर्ष भी हमारे पास काम अच्छा था और इस बार उससे भी ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है। दिवाली पर्व को लेकर सभी जगह दिये बनाए जा रहे हैं और इनकी बिक्री भी शुरू हो गई है।
दौलतराम।