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हरिद्वार न हरद्वार, यह है गंगाद्वार

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हरिद्वार न हरद्वार, यह है गंगाद्वार
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। श्रीराम कृष्ण मंडल की कल्लूमल की बगीची में चल रही भक्तमाल कथा में अयोध्या से आए हुए संत नरहरी दास ने प्रभु की भक्ति से श्रद्धालुओं को रूबरू करवाया। कथा वाचक नरहरी दास ने कहा कि सब कुछ मिल जाए पर भगवान न मिले तो जीवन व्यर्थ है। उन्होंने भक्त कोशारव की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि कोशारू ऋषि के पुत्र होने की वजह से उनका नाम कोशारव पड़ा। वे ऋषि हरिद्वार में रहते थे। एक बार हरी के भक्तों और शिव भक्तों में लड़ाई हो गई। वे लड़ते-लड़ते व्यास जी के आश्रम में पहुंच गए। व्यासजी से पूछा कि यह हरद्वार है या हरिद्वार। तो व्यास ने कहा कि न यह हरिद्वार है और न हरद्वार, ये तो गंगा द्वार है। कथा में ओमप्रकाश, सियाराम पंसारी, घनश्याम गर्ग, सचिन बंसल, नरसिंह, रवींद्र, सुशील चौधरी, शिवहरी यादव, सुरेश मास्टर, मिथलेश बंसल, शशि, अंगुरी देवी, अनीता, रामदुलारी, संजू बंसल, ताराचंद बंसल आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।
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