नारनौल। शराब ने कई जिंदगी छिनी तो कई परिवार उजाड़ दिए। किशोर अवस्था में ही सैकड़ों युवा नशे की गर्त में धंसते चले गए। इससे सबक लेते हुए ग्राम पंचायतों ने शराबबंदी की मुहिम छेड़ी लेकिन सुधार की तरफ बढ़ रही इन पंचायतों को शासन और प्रशासन ने आबकारी नीति व नियमों का हवाला देकर दरकिनार कर दिया।
जिले की ऐसी 11 ग्राम पंचायतों ने इस बार उनके गांव में शराब बंदी यानी शराब का ठेका न खोलने को लेकर आबकारी विभाग में आवेदन किए थे लेकिन किसी भी ग्राम पंचायत का आवेदन मंजूर नहीं हुआ। इन ग्राम पंचायतों और स्थानीय अधिकारियों को चंडीगढ़ मुख्यालय सुनवाई के लिए भी बुलाया गया लेकिन कोई ग्राम पंचायत नियमों पर खरा नही उतर सकी। अब इस चालू वित्त वर्ष से उन ग्राम पंचायतों के एरिया में भी शराब ठेके या उप ठेके खुलेंगे जिन्होंने शराब बंदी को लेकर प्रस्ताव भेजे थे।
जिले में मौजूदा आबकारी वर्ष 11 जून को पूरा हो रहा है। वर्ष 2023-24 के लिए 12 जून से शराब के ठेके खुलेंगे। इस वित्त वर्ष के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से पहले सितंबर तक ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मांगा गया था, लेकिन तब तक ग्राम पंचायतों का गठन नहीं हुआ था। नवंबर माह में सरपंचों व पंचों के लिए मतदान हुआ और तीन दिसंबर को ग्राम पंचायतों ने कार्यभार संभाल लिया। ग्राम पंचायतों के चुनाव को लेकर आबकारी एवं कराधान विभाग ने गांवों में ठेके न खुलवाने के लिए ग्राम पंचायतों को समय दिया गया था। इस अवधि में ग्राम पंचायतें प्रस्ताव पास करके आबकारी एवं कराधान विभाग को दे सकती थी। आठ ग्राम पंचायतों ने समय रहते प्रस्ताव दिए थे और बाकी 3 ने लेट प्रस्ताव दिए थे, लेकिन उन्हें भी मुख्यालय भेज दिया गया था। मुख्यालय ने किसी का प्रस्ताव मंजूर नहीं किया।
पिछले साल भी किसी ग्राम प्रस्ताव का नहीं हो सका था प्रस्ताव पारित
पिछले साल भी जिले की कई ग्राम पंचायतों की तरफ से शराब बंदी के प्रस्ताव आबकारी विभाग को भेजे गए थे लेकिन किसी का प्रस्ताव उस समय भी मंजूर नहीं हो सका था। उस समय भी ग्राम पंचायतों के शराब बंदी के अरमान धरे के धरे रह गए थे और इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है।
इस साल इन ग्राम पंचायतों ने भेजे थे प्रस्ताव
रोजावास, खटोटी खुर्द, भांखरी, नांगल हरनाथ, मानपुरा, सायाना, नोटाना, बारडा, पाली, महासर, धौली ग्राम पंचायतों ने आबकारी विभाग के पास प्रस्ताव पारित करके भेजे थे, लेकिन किसी का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है।
प्रस्ताव पारित न होने के यह रहे मुख्य कारण
-कई ग्राम पंचायतों ने प्रस्ताव लेट भेजे।
-ग्राम पंचायतों को गांव की जनसंख्या का 1/10 प्रतिशत का प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराने होते हैं लेकिन कई ने केवल सदस्यों के हस्ताक्षर ही कराए।
-नियमों को पूरा नहीं कर रही थी ग्राम पंचायत।
इस बार 11 ग्राम पंचायतों ने शराब बंदी को लेकर प्रस्ताव भेजे थे। ग्राम पंचायत और अधिकारी चंडीगढ़ गए थे, लेकिन नियमों को पूरा न करने व प्रस्ताव में कमियों के कारण उनको मंजूरी नहीं मिल सकी। इसलिए किसी ग्राम पंचायत का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। कुछ प्रस्ताव लेट भी आए थे। उनको भी भेज दिया गया था लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी।
-अनिल कुमार, डीईटीसी एक्साइज