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वैवाहिक जीवन जी रहे एड्स रोगी

Sun, 01 Dec 2013 10:35 PM IST
अमर उजाला गुड़गांव
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एड्स रोगी भी समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं और उनको भी संतान की प्राप्ति हो सकती है। एड्स रोगी न केवल वैवाहिक बंधन में बंधकर सुखमय जीवन जी रहे हैं, बल्कि उनके यहां एचआईवी निगेटिव संतानें भी जन्म ले रही हैं। जिले में इस साल अभी तक 10 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।
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इंटीग्रेटिड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर की काउंसलर पूनम राठी बताती हैं कि पिछले साल सिविल अस्पताल में ऐसी 12 महिलाओं की डिलीवरी हुई थी और सभी मामलों में शिशु को एचआईवी नेगेटिव पाया गया था। इस साल भी अब तक ऐसी दस डिलीवरी हो चुकी है। खास बात है कि इस साल भी कोई शिशु एड्स की चपेट में नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि अगर चिकित्सीय परामर्श लेकर संतान प्राप्ति की जाए तो शिशु को एचआईवी से बचाया जा सकता है। केवल 30 फीसदी मामले ऐसे होते हैं, जिनमें शिशु को जन्म के समय एचआईवी मिलता है।

इनमें से केवल एक फीसदी मामले ही ऐसे होंगे, जहां बच्चा 18 माह बाद भी एचआईवी पॉजीटिव रह जाता है। शेष बच्चे इस अवधि के दौरान ही एचआईवी से पूरी तरह निजात पा लेते हैं। उन्होंने दावा किया कि अभी तक के कैरियर में केवल एक मामला ऐसा देखा है, जहां 18 माह बाद भी कोई शिशु एचआईवी पॉजीटिव रह गया। शेष में बच्चे पूरी तरह स्वस्थ निकले।
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कई जोड़े बिता रहे हैं वैवाहिक जीवन
एड्स रोगियों के लिए काम कर रही संस्था एनपीपी की प्रधान ने बताया कि अब तक 18 जोड़ों की शादी कराई है। इनमें से दो जोड़े ऐसे हैं, जिन्होंने हाल ही में संतान की प्राप्ति की है। दोनों शिशु एड्स नेगेटिव है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी एचआईवी पॉजीटिव लोगों को स्वीकार्यता नहीं मिल पाई है। ऐसे में एक दूसरे का साथ ही एड्स रोगियों को विवाह के लिए प्रेरित कर रहा है। चूंकि अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध हो गई हैं, लिहाजा वंश को आगे बढ़ाने की इच्छा भी पूरी होने लगी है।
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