कुरुक्षेत्र। वैदिक संस्कृति में गुरु शिष्य को शिक्षा और दीक्षा के माध्यम से शिक्षित करता है। शिक्षा वह है जो गुरु द्वारा शिष्य को साक्षात, प्रत्यक्ष रूप में प्रशिक्षण के माध्यम से दी जाती है। दीक्षा उसे कहते है जो शिष्य शिक्षा पूरी होने के उपरांत समाज में जाकर मिले हुए ज्ञान का प्रचार-प्रसार करता है, दूसरों लोगों को सद्मार्ग पर चलने और राष्ट्रहित के कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
ये शब्द गुरुकुल में चल रहे प्रांतीय आर्य वीर दल शिविर में आए युवाओं को संबोधित करते हुए आर्य प्रतिनिधि सभा के संरक्षक कन्हैयालाल आर्य ने कहे। वे समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि शिविर में मिले शारीरिक प्रशिक्षण और बौद्धिक ज्ञान को स्वयं तक सीमित न रखकर दूसरों को भी सिखाएं तथा वैदिक सभ्यता, संस्कृति और ऋषि दयानंद सरस्वती के अमर संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि शिविर के दौरान आपकी जीवन-शैली में जो बदलाव आया है, वह आपके व्यवहार में झलकना चाहिए। आप अपने माता-पिता, गुरुजनों का प्रातः चरण-वंदन करें, आर्य समाज के साप्ताहिक समारोह में जाएं जिससे आपसी प्रेम में वृद्धि होगी, रिश्ते मजबूत होंगे। हवन को अपने जीवन में आत्मसात करें, दैनिक या साप्ताहिक संभव न हो तो मासिक यज्ञ अपने घरों में अवश्य करें।
आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान राधाकृष्ण आर्य ने कहा कि आज हर माता-पिता अपने बालक के भविष्य को लेकर चिंतित है क्योंकि समाज में फैली नशाखोरी ने युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार बना दिया है। ऐसे में आर्य समाज और आर्य वीर दल ही ऐसे संगठन है जो समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने का दम रखते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी आर्य वीर दल के सिपाही रहे हैं और संगठन में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। उन्होंने मुख्य अतिथि कन्हैयालाल जी को विश्वास दिलाया कि प्रतिनिधि सभा की कार्यकारिणी का एक-एक सदस्य आर्य वीर दल की भट्टी में तपकर निकला है। उनकी पूरी टीम समाज में फैली बुराइयों को दूर करने और राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक खेती मिशन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने शिविर में आए युवाओं द्वारा किये गये सूर्य नमस्कार, डम्बल, लेजियम, जूड़ो-कराटे, पीटी, लाठी आदि प्रदर्शन और शिविर संयोजक संजीव आर्य व उनकी टीम में शामिल सभी व्यायाम शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के ओएसडी डाॅ. राजेंद्र विद्यालंकार ने कहा कि आर्य वीरों ने सामान्यतः पांच महीनों में सीखे जाने वाले पाठ्यक्रम को मात्र तीन दिन में सीख लिया और शानदार प्रदर्शन भी किया।
समारोह को वैदिक विद्वान पंकज आर्य, वरिष्ठ भजनोपदेशक जयपाल आर्य ने भी संबोधित किया। इस दौरान आर्यवीरों ने पांच दिनों में सिखाए गये लाठी, डम्बल, लेजियम, सूर्य नमस्कार, सर्वांग सुंदर व्यायाम, दंड-बैठक, योगासन, पीटी आदि का शानदार प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर सभा प्रधान राधा कृष्ण आर्य, उप प्रधान देशबन्धु आर्य, ओएसडी टू गवर्नर डॉ. राजिन्द्र विद्यालंकार, उप मंत्री अनुराग खटकड़, रणदीप कादियान, गुरुकुल प्रधान राजकुमार गर्ग, प्राचार्य डाॅ. सूबे प्रताप, व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, वैदिक विद्वान पंकज आर्य, संदीप वैदिक सहित सभा के अंतरंग सदस्य राममेहर आर्य, बलवान आर्य, विशाल आर्य, सुरेंद्र आर्य व विभिन्न स्कूलों से आए अध्यापक उपस्थित रहे। मंच संचालन शिविर संयोजक संजीव आर्य, जयपाल आर्य और विशाल आर्य द्वारा किया गया।