कुरुक्षेत्र। अनाजमंडी में जगह न होने के कारण किसानों द्वारा सड़क पर उतारी गई धान।
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कुरुक्षेत्र। अधिकारियों द्वारा समय रहते अनाज मंडियों में व्यवस्था बनाने को लेकर की गई अनदेखी किसानों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। हर सीजन की तरह इस बार फिर किसानों को मंडियों में इस अनदेखी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। मंडियां धान से भरी पड़ी हैं तो आसपास की सड़कों से लेकर पार्किंग स्थल तक धान से अट गए हैं। ऐसे हालात में शुक्रवार को मौसम ने करवट ली तो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई।
शनिवार से पांच दिन तक बारिश की संभावना जताई जा रही है, ऐसे में किसानों के समक्ष अपने धान को बचाना बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। मंडियों में धान बचाने के लिए न पर्याप्त व्यवस्था है और न ही अधिकारी उठान कार्य ही समुचित करवा पाए हैं। ऐसे में बारिश के चलते बड़ी मात्रा में धान खराब होने की आंशका से इंकार नहीं किया जा सकता। अब किसानों को चिंता है कि बारिश हुई तो उनकी खेतों में धान की कटाई रूक जाएगी तो वहीं मंडियों में भी धान खराब होगी। आढ़तियों की मानें तो जिला भर की मंडियों व आसपास के क्षेत्र में 55 लाख क्विंटल से ज्यादा धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है।
धान खराब हुआ तो कौन रहेगा जिम्मेदार : सुरजीत
धान लेकर पहुंचे किसान सुरजीत सिंह का कहना था कि मंडियां धान से अटी है। मंडियों में जगह नहीं रही तो किसान सड़कों पर ही धान डालने को मजबूर होने लगे। अधिकारी खरीदी जा चुकी धान का भी अभी तक उठान नहीं करवा पाए हैं। अब पांच दिन बारिश का अनुमान है, इसमें धान खराब हुई तो जिम्मेदार कौन होगा।
452223 मीट्रिक टन धान की खरीद, आधे का नहीं हुआ उठान
जिला भर की मंडियों व खरीद केंद्रों में पर वीरवार तक एजेंसियों ने 452 223 मीट्रिक टन धान की खरीद की है, लेकिन उठान महज 207 666 एमटी धान का ही हो पाया है। प्रशासन के अनुसार अब तक 58627 किसानों की धान की फसल की खरीदी जा सकी है की जा चुकी है, जिसमें से फूड एंड सप्लाई विभाग द्वारा 43866 किसानों और हैफेड द्वारा 14761 किसानों की धान की फसल खरीदी गई है। उपायुक्त शांतनु शर्मा का कहना है कि जिले में खरीद केंद्रों पर धान की खरीद का कार्य सुचारु रुप से चल रहा है। खरीद केंद्रों पर किसान अपनी फसलों को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार लेकर पहुंच रहे है।