कुरुक्षेत्र। 10वीं पास किरमिच गांव की सुनीता रानी महिलाओं का स्वरोजगार शुरू करा उनके सपनों को पंख लगाने का काम रही हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के चलते अब वे हर किसी के लिए मिसाल बन चुकी हैं। हर कोई अब गांव में उन्हें सम्मान की नजर से देखता है। साल 2014 में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के महिला समूह से जुड़कर काम शुरू किया तो मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन कड़ा इरादा कर मेहनत करने की ठानी तो कामयाबी ही कदम चूमने लगी।
स्वयं का उद्योग खड़ा कर कामयाबी मिली तो हौसले बुलंद होने लगे। अपनी मुश्किलों से सीख लेते हुए दूसरी महिलाओं का सहारा बनने की सोची, पहले गांव की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए जागरूक कर, उनके स्वयं सहायता समूह बनाए और फिर धनौरा, बीबीपुर, दिवाना, धुराला, हिंगा खेड़ी, कसेरला, कनीपला, धीरपुर सहित कई गांवों में जाकर महिलाओं को स्वरोजगार के लिए जागरूक कर 350 से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह बनाए तो 3500 के करीब महिलाएं साथ जुड़ गई। आज गांव ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी उनकी अलग पहचान है।
कड़ी मेहनत से मिलने लगी कामयाबी : सुनीता रानी
सुनीता रानी ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी, जिसके चलते साल 2014 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार शुरू किया, जिसमें कई कठिनाइयां भी आईं, लेकिन कड़ी मेहनत करने पर कामयाबी मिली। इसलिए दूसरों गावों की महिलाओं को भी स्वरोजगार करने के लिए जागरूक किया। इसके लिए कई गावों में जाकर 350 महिलाओं के समूह तैयार किए, जिसमें 3500 महिलाएं शामिल है। अब सभी महिलाएं स्वयं का रोजगार कर आत्मनिर्भर बन गई हैं।
महिलाएं हुई आत्मनिर्भर : गौरव कुमार
खंड कार्यक्रम अधिकारी गौरव कुमार का कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांवों में स्वयं सहायता समूह बनाए गए है। अब महिलाएं स्वयं का रोजगार शुरु आत्मनिर्भर हो रही हैं। महिलाएं जहां परिवार का पालन पोषण करने में सक्षम है तो वहीं स्वयं के सपने भी पूरा कर पा रही हैं।
कुरुक्षेत्र। किरमिच गांव में स्वयं का रोजगार करती सुनीता रानी। संवाद
कुरुक्षेत्र। किरमिच गांव में स्वयं का रोजगार करती सुनीता रानी। संवाद