कुरुक्षेत्र। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की ओर से जैसे-जैसे योद्वा मैदान में उतारे जा रहे हैं वैसे ही कुरुक्षेत्र के रण की तस्वीर भी साफ होने लगी है। अभी तक राजनीतिक पार्टियों व संभावित प्रत्याशियों को लेकर ही चुनावी समीकरणों की अटकलें लगाई जाती रही लेकिन अब अधिकतर योद्धा मैदान में आए तो समीकरण भी बदल गए हैं। पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार चुनावी महाभारत बेहद खास होने वाली है। इसमें कौन विजयी होगा, यह तो समय आने पर पता चलेगा लेकिन सभी योद्वाओं ने अपनी-अपनी रणनीति बनाकर शह-मात का खेल शुरू कर दिया है।
चुनावी माहौल गर्म होने लगा तो हर गली व कूचे में भी जीत-हार को लेकर चर्चाएं आम होने लगी है। मैदान में उतरे योद्वाओं के भी अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने व विरोधी को पटखनी देने के लिए पसीने छूटे हुए हैं। कोई जातीय समीकरण बैठाने लगा है तो कोई अपनी पुरानी जमीन तलाश रहा है। यहां तक कि पुराने बिगड़े संबंधों को भी दुरूस्त करने के लिए जमकर पसीना बहाया जाने लगा है।
लाडवा विस क्षेत्र
जिला ही नहीं प्रदेश में यह सबसे हॉट सीट मानी जा रही है। यहां भाजपा मुख्यमंत्री नायब सैनी को मैदान में उतार चुकी है। भले ही वे इस क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ेंगे लेकिन यह भी पहला ही मौका होगा जब कोई मुख्यमंत्री का चेहरा मैदान में होगा। नायब सैनी यहां मुख्यमंत्री के चेहरे के सहारे ही नहीं है बल्कि वे पिछले तीन दिन से कड़ा पसीना बहाने में लगे हैं। उधर कांग्रेस ने उन्हें टक्कर देने के लिए वर्तमान विधायक मेवा सिंह पर भरोसा जताया है, जिन्होंने मोदी लहर टू में यहां कमल का रथ रोकते हुए कांग्रेस को जीत दिलाई थी। वहीं इनेलो-बसपा ने दिग्गज नेता शेर सिंह बड़शामी पर भरोसा जताया हुआ है। वे भी चुनावी युद्व जीतने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। हालांकि अन्य पार्टियों की ओर से अभी इस क्षेत्र में प्रत्याशी नहीं उतारे हैं।
थानेसर विस क्षेत्र
इस क्षेत्र में फिलहाल भाजपा व कांग्रेस के धुरंधरों के बीच टक्कर मानी जा रही है। इन दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हुए है। भाजपा ने जहां दो बार विधायक रह चुके एवं वर्तमान राज्यमंत्री सुभाष सुधा को फिर मौका दिया हुआ है वहीं कांग्रेस ने दिग्गज नेता व चार बार विधायक रह चुके अशोक अरोड़ा को उन्हें टक्कर देने के लिए मैदान में उतारा है। ये दोनों ही चुनावी योद्वा पंजाबी समुदाय है, जिसके चलते अब हर किसी की नजरें इस क्षेत्र पर टिक गई है। यहां पंजाबी समाज की वोटों का ध्रुवीकरण होने की भी चर्चाएं होने लगी है। उधर इसी क्षेत्र से निर्दलीय तौर पर मैदान में आ चुके भाजपा नेता कृष्ण बजाज भी अपनी ताल ठोक चुके हैं। वे भी पंजाबी समुदाय से ही है।
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शाहाबाद विस क्षेत्र
कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस व अन्य दलों को मौका देने वाले इस क्षेत्र में भी चुनावी जंग रोचक होने वाली है। यहां भाजपा ने जहां पहली बार चुनाव लड़ रहे सुभाष कलसाना को मैदान में उतारा है तो वहीं उन्हें टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने रामकरण काला को प्रत्याशी बनाया है। वे वर्तमान में विधायक है और कुछ दिनों पहले ही जजपा को छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए थे। इन दोनों के अलावा फिलहाल किसी पार्टी ने इस क्षेत्र में अपना चुनावी योद्वा मैदान में नहीं उतारा है। अब यहां देखना होगा कि सुभाष कलसाना पहली बार में ही भाजपा का कमल खिला पाएंगे या फिर उन पर वर्तमान के विधायक भारी पड़ेंगे। हालांकि दोनों चेहरों को लेकर लोगों के बीच अपने-अपने कयास हैं।
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पिहोवा विस क्षेत्र
इस क्षेत्र में अभी चुनावी युद्व की तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है, जिसके चलते यहां समीकरण खास तौर पर सामने नहीं आ रहे। भले ही भाजपा ने यहां पहली बार चुनाव लड़ने वाले कंवलजीत अजराना को प्रत्याशी बनाया हुआ है वहीं उन्हें टक्कर देने के लिए जजपा ने शिक्षक डॉ सुखविंद्र कौर को मैदान में उतारा है। वहीं इस क्षेत्र को लेकर फिलहाल कांग्रेस व आप के बीच गठबंधन की उम्मीदों के चलते पशोपेश ही बना रहा। कभी आप की ओर से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी तो कभी अन्य परिवारजन के मैदान में आने तो कभी कांग्रेस का अपना चेहरा ही प्रत्याशी होने की चर्चाएं सामने आ रही है। फिलहाल पिछले पांच साल से यह क्षेत्र भाजपा के कब्जे में हैं।