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व्यास पूजा व्यक्ति नहीं, परंपराओं की पूजा है : स्वामी ज्ञानानंद

Tue, 23 Jul 2024 06:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के सानिध्य में जीओ गीता परिवार की ओर से सोमवार को गीता ज्ञान संस्थानम में गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया गया। इस दौरान कुरुक्षेत्र के अतिरिक्त शाहाबाद, पिहोवा, लाडवा, बाबैन, बराड़ा एवं कैथल समेत अन्य क्षेत्रों से काफी संख्या में श्रद्धालु संस्थान के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानानंद ने कहा महर्षि वेदव्यास के नाम से जुड़े व्यास पूजा के पर्व में केवल व्यक्ति की नहीं अपितु परंपराओं की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि व्यास केवल नाम नहीं बल्कि व्यास परंपरा हैं, आदर्श और एक प्रेरणा हैं।
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उन्होंने कहा कि भारत परंपराओं का देश है और परंपराएं हमारे देश की दिव्यता हैं। व्यास पूर्णिमा का पर्व अवतार परंपरा, ऋषि परंपरा, ग्रंथ परंपरा, संत परंपरा एवं गुरु परंपरा से जुड़ा हुआ पर्व है। ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि अगर महर्षि वेदव्यास न होते तो गीता उपदेश महाभारत काल की घटना मात्र बनकर रह जाता। व्यास जी की कृपा से ही भगवान कृष्ण द्वारा दिया गया उपदेश युगों-युगों की एक शाश्वत एवं अमर प्रेरणा बन गया। इस मौके पर राजेंद्र चोपड़ा, मदन मोहन छाबड़ा जितेंद्र ढींगरा, विजय नरूला, अशोक अरोड़ा, सुनील वत्स, गुरदयाल सुनहेड़ी एवं पवन भारद्वाज मौजूद रहे।



जीवन में गुरु की भूमिका अनमोल : जिंदल

गीता ज्ञान संस्थान के व्यास पूजा कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल विशेष रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला। सांसद ने कहा कि गुरु हमारा हाथ थामे पग-पग पर हमें चलना सिखाता है। गुरु ही हमें परमात्मा से मिलाने का काम करता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु की भूमिका अनमोल है। गुरु के दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम दिन-प्रतिदिन उन्नति की राह पर अग्रसर होते हैं।
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