कुरुक्षेत्र। उच्च शिक्षा संस्थानों में नीडो-गवर्नेंस के लिए न केवल प्रतिबद्धता, बल्कि समर्पण के साथ आत्म-जागरूकता की आवश्यकता है। गीता-आधारित नीडोनॉमिक्स को समझने और अपनाने की आवश्यकता है। ये विचार तीन बार कुलपति रहे एवं नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक प्रो. मदन मोहन गोयल ने ऑनलाइन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ओरिएंटेशन और सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम में व्यक्त किए।
प्रो. गोयल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। रविवार को यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया था, जिसमें मुख्य वक्ता प्रो. गोयल रहे। उन्होंने संस्थागत प्रबंधन में नीडो-गवर्नेंस हेतु शैक्षणिक नेतृत्व एवं नीडोनॉमिक्स संस्थागत प्रबंधन में नीडो-गवर्नेंस के लिए निहितार्थ विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि शैक्षणिक संस्थानों में नीडो-गवर्नेंस की एक नई कहानी लिखने हेतु स्ट्रीट स्मार्ट मॉडल के माध्यम से शैक्षणिक नेतृत्व में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करनी चाहिए। नए दृष्टिकोण अपनाकर और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देकर, संस्थान अकादमिक नेतृत्व के उच्च मानकों को लगातार सुधार कर बनाए रख सकते हैं। आधुनिक समाज की चुनौतियां ऐसी शासन प्रणाली की मांग करती हैं जो लैंगिक-तटस्थ साहित्य के साथ सतत मानव विकास को बढ़ावा दे।