कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की एनएसएस यूटीडी इकाई की ओर से साप्ताहिक शिविर का आयोजन किया गया, जिसका विषय लोकतंत्र का महापर्व और युवाओं की सहभागिता रहा। शिविर के छठे दिन स्वयंसेवकों ने नरकातारी गांव में स्थित तीर्थ बाण गंगा व इसके आसपास स्वच्छता अभियान चलाया। गांव के सरपंच केहर सिंह ने स्वयंसेवकों को प्रोत्साहित किया और इस तीर्थ के ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि यहां पांच वृक्षों की आयु 80 वर्ष होने पर सरकार द्वारा प्रतिवर्ष उनके रख रखाव हेतु तीन हजार रुपये पेंशन के रूप में पंचायत को प्राप्त होते हैं।
डॉ. राजकमल डॉ. सुनील कुमार, डॉ. दीप्ति चौधरी व स्वयंसेवकों के माध्यम से स्वच्छता के महत्व से अवगत कराया और उन्हें गीले और सूखे कचरे के निस्तारण हेतु प्रशिक्षण भी दिया गया। उन्होंने आह्वान किया कि अपने घरों के आंगन में औषधीय पौधे व बाहर बड़े स्थानों पर छाया व फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण को संरक्षित करना चाहिए। वक्ता ललित कला विभाग के डॉ. गुरचरण सिंह ने बताया कि संस्कृति हमारे पर्यावरण का मानव निर्मित भाग है, जिसमें कला एक अभिन्न अंग है। संस्कृति भौतिक व अभौतिक दोनों प्रकार की होती है। यह केवल सीखी जा सकती है और बाद में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को उसे सीखने की प्रक्रिया और अनुभवों के द्वारा हस्तांतरित की जाती है। कला समाज में प्रतीकों, चिह्नाें, रीति रिवाजों व प्रदर्शन के माध्यम से प्रसारित होती है।
शाम के सत्र में सामाजिक विषयों से कराया रूबरू
शाम के सत्र में वक्ता जिला पुलिस मुख्यालय से सब इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने स्वयंसेवकों को विभिन्न सामाजिक विषयों से रूबरू कराया। यातायात के नियमों से अवगत कराया। युवाओं को नशे व मादक द्रव्यों की लत के खिलाफ सचेत किया और इसके दुष्प्रभावों के बारे में भी अवगत कराया। साइबर अपराधों के बारे में बताया कि किस तरह इलेक्ट्रॉनिक व इंटरनेट माध्यमों से अपराधी हमें अपना शिकार बनाते हैं। इसी के साथ इनसे बचने के उपाय बताए कि समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहना चाहिए और भ्रामक लिंक व अनजान प्रलोभन प्रेरित फोन कॉल से संपर्क करते हुए सतर्कता बरतनी चाहिए।