कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय नव वर्ष के शुभारंभ के मौके पर मंगलवार को विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अंबेडकर स्टडीज सेंटर के उप-निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह रहे। इस दौरान देश की माटी के कण-कण में संस्कृति और परंपराओं की झलक के संबंध में बताया गया।
डॉ. प्रीतम सिंह ने कहा कि भारत का हजारों वर्षों का इतिहास है। मगर मानसिक दासता की वजह से भारतीय जनमानस अपनी भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं को भुला बैठा है। भगवान ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि का निर्माण किया तभी से भारतीय नववर्ष मनाया जाता रहा है। एक जनवरी को पूरे विश्व में नया साल मनाया जाता है किंतु अंग्रेजों का कालखंड ज्यादा पुराना नहीं है। अंग्रेज ईसा के जन्म से ही अपने वर्ष का प्रारंभ करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को वैसे ही सोने की चिड़िया नहीं कहा जाता। इसकी माटी के कण-कण में भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। यहां के लोगों का जीवन बड़ी सुगमता और व्यवस्थित तरीके से चलता था। मगर कुछ मुट्ठी भर लोगों ने भारतीय जीवन मूल्यों को सोची-समझी रणनीति के तहत तहस-नहस किया।
उन्होंने कहा कि आज भी हमें अकबर महान है ऐसा पढ़ाया जाता है जबकि किताबों में शिवाजी, गुरु गोविंद, महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों को शामिल करने की जरूरत है। विश्व आयुर्वेद परिषद हरियाणा के शिक्षक प्रकोष्ठ से डॉ. प्रेम चंद मंगल ने आयुष विवि के सभी शिक्षकों, अधिकारियों,कर्मचारियों और छात्र छात्राओं को भारतीय नव वर्ष की बधाई दी। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय स्टाफ के लिए शुरू की गई अन्नपूर्णा रसोई का उद्घाटन किया, जिसमें सभी अधिकारी व कर्मचारियों के लिए भोजन को रखने की व्यवस्था की गई है। मंच का संचालन पीजी स्कॉलर की छात्रा डॉ. भावनाऔर डॉ. मिनाली ने किया। कार्यक्रम के अंत में श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना व कार्यक्रम के संयोजक डॉ. शंभू दयाल ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार भार्गव, डीन ऑफ कॉलेज डॉ. विदुषी त्यागी, डॉ. मनोज तंवर, डॉ.कृष्ण जाटियान, डॉ. सचिन शर्मा, डॉ.मनीषा, डॉ. ममता, डॉ. सतबीर चावला,डॉ. नेहा लांबा, डॉ. बिजेंद्र तोमर और विश्वविद्यालय के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।