दक्षिण हरियाणा से लेकर दिल्ली तक की कई वर्षों से प्यास बुझा रही कुरुक्षेत्र से होकर गुजरने वाली नरवाना ब्रांच नहर अधिकांश जगह से जर्जर हो चुकी है। पिछले करीब 10 वर्षों से पुर्ननिमाण की बाट जोह रही नहर इस कदर कमजोर पड़ चुकी है कि अपनी क्षमता का पानी भी नहीं झेल पा रही, जिसके चलते इसमें करीब 1300 क्यूसेक पानी कम छोड़ा जा रहा है। इसकी भरपाई हरियाणा व पंजाब के लिए सबसे बड़ा मुद्दा रही सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर कर रही है। नहर के कमजोर पड़ जाने संबंधी तथ्य न केवल सिंचाई विभाग के अधिकारी स्वीकार कर रहे हैं बल्कि केंद्रीय जल आयोग तक यह रिपोर्ट दे चुका है।
उल्लेखनीय है कि अंबाला के जनसुई हेड से निकलने के बाद शाहाबाद के ढल्ला माजरा गांव से कुरुक्षेत्र की सीमा में यह नहर प्रवेश करती है, जो करीब 31 किलोमीटर दूरी तक धर्मनगरी से होते हुए करनाल के बुढेड़ा हेड पहुंचती है। यहां से करनाल व पानीपत होते हुए दिल्ली पहुंचती है। शुरूआत में नहर की क्षमता 3792 क्यूसेक रखी गई, लेकिन इसकी जर्जर हालत के चलते इसमें पिछले करीब दस वर्षों से करीब 2500 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है। गौरतलब है कि इसमें क्षमतानुसार पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इसमें से करीब 1392 क्यूसेक पानी एसवाईएल नहर के जरिए ही दिल्ली की ओर भेजा जाता है, ताकि पानी तय मात्रा में पहुंचाया जा सके।
जर्जर नहर से हर समय बना रहता है खतरा
नरवाना ब्रांच नहर की हालत पूरी तरह से जर्जर है और इसका पुर्ननिर्माण कब होगा, यह कहने को कोई तैयार नहीं है। नहर की हालत को देख हर समय खतरा बना रहता है, वहीं बारिश का सीजन आते ही अधिकारियों की सांसें फूल जाती हैं। दिन-रात निगरानी कराने को मजबूर होना पड़ता है। इस वर्ष भी बारिश के सीजन में नहर ओवरफ्लो हुई थी, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा था।
चार साल पहले भी बना था एस्टीमेट
अन्य जिलों में भी इस नहर की हालत जर्जर है, लेकिन अंबाला से कुरुक्षेत्र तक इसके पुर्ननिर्माण को लेकर करीब चार साल पहले भी सिंचाई विभाग ने एस्टीमेट बनाकर सरकार को भेजा था। यह भी स्पष्ट किया गया था कि इस नहर के पुर्ननिर्माण से पहले एसवाईएल की मरम्मत जरूरी है, ताकि नरवाना ब्रांच नहर का पानी पूरी तरह इसमें छोड़ा जा सके। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 185 करोड़ रुपये की लागत उस दौरान आंकी गई थी, जिसमें करीब 160 करोड़ रुपये नरवाना ब्रांच पर खर्च होने थे। उस दौरान तत्कालीन डीसी ने भी नहर का निरीक्षण किया था।
एसवाईएल नहर में डायवर्ट करना पड़ रहा पानी : एक्सईएन
विभाग के एक्सईएन गुरविंद्र सिंह दयोल का कहना है कि नहर की हालत कमजोर है, जिसके चलते इसमें पूरी क्षमता के अनुसार पानी नहीं छोड़ा जा रहा। इसमें से पानी साथ बह रही एसवाईएल में डायवर्ट करना पड़ रहा है। नहर के पुर्ननिर्माण की जरूरत है, लेकिन यह सरकार के स्तर का मामला है।
एसवाईएल भी बरपा चुकी है कहर
नरवाना ब्रांच के साथ ही बह रही एसवाईएल नहर की हालत भी बेहद दयनीय है, जिसके चलते कुरुक्षेत्र में ही यह नहर तीन बार कहर बरपा चुकी है। वर्ष 2010 व इससे पहले का कहर लोग भूल भी नहीं पाए थे कि इस वर्ष भी इस नहर ने साथ बहने वाली बरसाती ड्रेन के जरिए कहर बरपाया था।