कुरुक्षेत्र। धान का क्षेत्र कहे जाने वाले कुरुक्षेत्र, कैथल व यमुनानगर में लगातार गिरते जा रहे भूजल स्तर को अब सोम नदी के पानी से रोका जाएगा। इसके लिए सरस्वती नदी बड़ा स्त्रोत बनेगी, जिसमें न केवल सोम नदी का पानी बहेगा बल्कि यह इसके जलाशयों में भी स्टोर किया जाएगा। इसके लिए सरस्वती नदी के तट पर यमुनानगर जिले के छिल्लौर, रामपुर हेरियां व रामपुर कोबियान गांवों में 350 एकड़ में विशेष जलाशय बनाया जाएगा, जिसमें करीब नौ किलोमीटर दूर से बह रही सोम नदी से पाइप लाइन के जरिए पानी लाया जाएगा। सरस्वती में यही पानी आगे कुरुक्षेत्र से होते हुए कैथल के घग्गर पर बने अंतिम छोर तक बहेगा। इसके लिए सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड ने योजना तैयार की है।
सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार को लेकर प्रदेश सरकार व सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड द्वारा बनाई गई योजना के दूसरे फेज के तहत यह कार्य होगा। बोर्ड का अनुमान है कि योजना सिरे चढ़ने के बाद सरस्वती के आसपास के क्षेत्र में न केवल गिरते भूजल स्तर को रोका जा सकेगा बल्कि इसमें सुधार भी होगा। इन क्षेत्रों का लगातार गिर रहा भूजल स्तर किसानों से लेकर प्रदेश व केंद्र सरकार के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। इन जिलों के कई क्षेत्र डार्क व रेड जोन में भी रह चुके हैं तो वहीं वर्ष 1920 से कुरुक्षेत्र व कैथल भूजल दोहन में ओवर एक्सप्लोयटिड घोषित है। यहां तक इस क्षेत्र मेें नए ट्यूबवेल लगाने पर भी पाबंदी लगानी पड़ी थी। दावा किया जा रहा है कि सरस्वती के चलते ही पिछले दिनों लाडवा में भूजल स्तर की गिरावट में कुछ सुधार हुआ है।
जलाशय का डिजाइन तैयार तो सैंपल जांच भी पूरी
जानकारी के मुताबिक सरस्वती नदी पर 350 एकड़ में बनाए जाने वाले खास जलाशय पर टेंडर प्रक्रिया आदि को लेकर जल्द काम शुरू हो सकता है। केंद्रीय जल आयोग की ओर से इसका डिजाइन फाइनल कर दिया गया है तो वहीं केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान केंद्र की ओर से यहां पानी व जमीन की सैंपलिंग भी पूरी कर ली गई है, जिसकी रिपोर्ट भी बोर्ड को मिल चुकी है।
इन गांवों में बनाए जा चुके सरस्वती किनारे पौंड
सरस्वती में आने वाला पानी रिचार्ज हो सके, इसके लिए साथ लगते गांवों में बोर्ड व संबंधित ग्राम पंचायतों के सहयोग से पौंड बनाए जा रहे हैं। अभी तक गांव बोहली, टाटका, कौलापुर, संघौर, भगवानपुर, मरचेहड़ी, रामपुराव झिंवरेहड़ी में इनका निर्माण किया जा चुका है।
भूजल स्तर में सुधार का बड़ा माध्यम बनेगी सरस्वती नदी : धुम्मन सिंह
सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच का कहना है कि सरस्वती नदी यमुनानगर, कुरुक्षेत्र व कैथल के भूजल स्तर में सुधार का बड़ा माध्यम बनेगी। पिछले साल ही बारिश के सीजन में एक करोड़ लीटर पानी सरस्वती पर बनाए पौंड के जरिए रिचार्ज किया गया गया था। इस बार दो करोड़ लीटर पानी रिचार्ज का लक्ष्य है। उक्त परियोजना पूरी होने पर यह पानी लगातार रिचार्ज होगा। नदी के जीर्णोद्धार को लेकर भी 70 फीसदी काम हो चुका है और फिर से लोग नदी की पूजा करने लगे हैं। नदी का जीर्णोद्धार पर्यटन को भी दृष्टिगत रखते हुए किया जा रहा है।
सिंचाई मंत्री बोले, सरस्वती नदी के चलते होगा भूजल स्तर में सुधार
सिंचाई एवं जल संसाधन राज्यमंत्री अभय सिंह यादव ने भी गत दिवस सरस्वती पर बनाए कई पौंड का जायजा लिया। उन्होंने भी माना कि हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड द्वारा पानी को रिचार्ज करके भूजल स्तर में सुधार करने के लिए सराहनीय कार्य किए जा रहे है। बोर्ड द्वारा पंचायत विभाग के माध्यम से पानी रिचार्ज के लिए जो थ्री व फाइव पौंड सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे कि पानी को साफ करके सरोवरों के माध्यम से सरस्वती नदी में डाला जा रहा है, उसके माध्यम से भी इस क्षेत्र के भूजल स्तर में सुधार हो रहा है।
कुरुक्षेत्र व कैथल में ब्लॉक अनुसार 10 साल में गिरा भूजल स्तर (मीटर में)
ब्लॉक- वर्ष 20142024
थानेसर 28.97-37.54
शाहाबाद38.1346.73
पिहोवा31.49-40.33
लाडवा28.04-29.96
बाबैन36.9341.46
इस्माईलाबाद-37.3945.61
पिपली35.64-42.48
कैथल26.35-33.59
गुहला32.5644.93
पूंडरी21.2130.08
राजौंद11.20-17.77
कलायत-7.5413.75
सीवन40.5752.37
ढांड24.67-36.28