कुरुक्षेत्र। हजारों वर्षों से गहरी आस्था का प्रतीक रही पवित्र सरस्वती नदी फिर पूजा-अर्चना से लेकर तर्पण का केंद्र बनेगी। नदी के किनारों पर फिर लोगों की चहल-पहल होगी। स्थानीय ही नहीं बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालु एवं पर्यटक भी इसके आसपास भ्रमण करते हुए दिखाई देने लगेंगे। तय योजना अनुसार परियोजना को सिरे चढ़ी तो अगले कुछ माह में ही नदी नए स्वरूप में दिखाई देने लगेगी। परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड की ओर से जहां सरस्वती की अविरल धारा को फिर से बहाए जाने के सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं वहीं इसे नया स्वरूप भी दिया जा रहा है। हजारों वर्षों पहले की तरह लोगों की इस नदी के प्रति आस्था को देखते हुए आदिबद्री से लेकर प्रदेश की सीमा तक न केवल घाट बनाए जा रहे हैं बल्कि रिवर फ्रंट भी तैयार किए जा रहे हैं।अभी तक करीब 60 लाख से ज्यादा की लागत से सात घाट बनाए जा चुके हैं जबकि 10 और घाट बनाए जाने की योजना तैयार कर ली गई है। यही नहीं यमुनानगर, कुरुक्षेत्र व कैथल में चार रिवर फ्रंट भी बनाए जाने की योजना है। कुरुक्षेत्र में पिपली व पिहोवा में ये फ्रंट बनाए जाने हैं जबकि यमुनानगर के मिल्क माजरा व कैथल के पोलड़ में ये फ्रंट होंगे। पिपली में पिछले दिनों मुख्यमंत्री मनोहर लाल रिवर फ्रंट कार्य का शुभारंभ कर चुके हैं।
यहां-यहां बन चुके घाट, सात से 10 लाख तक लागत
फिलहाल नदी पर गांव भैणी, बरगट, संघौर, रामपुरा, मरचेहड़ी, पिपली व गांधी नगर में घाट बनाए जा चुके हैं। करीब सात से 10 लाख रुपये तक की लागत से ये घाट 20 फीट से करीब 50 फीट तक लंबे हैं। वहीं अलग-अलग जगहों पर ऐसे 10 और घाट बनाए जाने की योजना है। इन ग्राम पंचायतों की ओर से भी बोर्ड के पास मांग पहुंची है।
इन रिवर फ्रंट पर चल रहा काम
बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच के मुताबिक अभी पिपली, पिहोवा व मिल्क माजरा जिला यमुनानगर में रीवर फ्रंट बनाए जाने पर काम चल रहा है जबकि कैथल के पोलड़ में भी जल्द शुरू होगा।
अगले तीन माह में पूरे होंगे अधिकतर कार्य : धुमन
बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच का कहना है कि सरस्वती पर प्रोजेक्ट के तहत घाट व रिवर फ्रंट बनाए जाने का कार्य किया जा रहा है। ये अधिकतर कार्य अप्रैल-मई माह तक पूरे कर लिए जाएंगे। घाट बनाए जाने से जहां लोग पूजा अर्चना व तर्पण भी कर सकेंगे वहीं रिवर फ्रंट बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन की दृष्टि से यहां अनेकों गतिविधियां होंगी। उनका कहना है कि सरस्वती पहले भी गहरी आस्था का केंद्र रही है और आज भी लोग उसी दृष्टि से देखते हैं। इसी के चलते सरकार इसे नया स्वरूप देने की दिशा में काम कर रही है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने भी सराहा
दिल्ली केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से संबंधित अधिकारियों की टीम बुधवार शाम को सरस्वती नदी प्रोजेक्ट पर चल रहे कार्य को देखने के लिए कुरुक्षेत्र व आदिबद्री पहुंची, जो यहां किए जा रहे कार्यों को लेकर सराहना करती दिखाई दी। केंद्रीय टीम का नेतृत्व अनिल साठे व अमेय कुमार ने किया। उन्होंने गांधी नगर घाट का शुभारंभ भी किया। टीम ने पूरे प्रोजेक्ट को देखा तो वहीं कहा कि बोर्ड की ओर से सही दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सरस्वती ज्ञान की देवी है। प्रोजेक्ट पर किए जा रहे कार्यों के चलते जल्द ही सरस्वती का स्वच्छ जल मिलेगा। इस दौरान बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने टीम को प्रोजेक्ट के बारे में बारीकी से जानकारी दी तो वहीं अगली योजना पर भी विस्तार से बताया। इस दौरान सरस्वती बोर्ड के सदस्य अमित रोहिला, नरेंद्र जांगड़ा, प्रदीप कुंद्रा, ईश्वर कौशिक, मास्टर्स सत्पर्कश, सरदार राघवेंद्र सिंह, रामधारी शर्मा आदि मौजूद रहे।