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... जब ओलंपियन सुरेंद्र पदक दिखाने और पांव छूने पहुंचे गुरु गुरविंद्र के पास

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..जब ओलंपियन सुरेंद्र पालड टोक्यो में देश के लिए कांस्य पदक जीतने के बाद सीधे भारतीय खेल प्राधिकरण कुरुक्षेत्र के प्रांगण में अपने गुरु गुरविंद्र सिंह के पांव छूने के लिए पहुंचा गुरु की आंखों में खुशी के आंसू झलक उठे। इन क्षणों को देखकर हॉकी की युवा पीढ़ी भी प्रेरणा से ओतप्रोत हो गई। यहां पहुंचने पर प्रशिक्षक गुरविंद्र सिंह के पांव छुए और अपना कांस्य पदक दिखाया। गुरविंद्र सिंह ने शिष्य ओलंपियन सुरेंद्र को गले लगाया और कांस्य पदक का चुंबन करके पेरिस ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने का आशीर्वाद दिया। गुरविंद्र सिंह ने सबसे पहले सुरेंद्र को मिठाई खिलाई और बुके देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सुरेंद्र 17 साल की अथक मेहनत के बाद आज ओलंपिक तक पहुंचकर देश के लिए मेडल जीतकर लाए है। यह साई के साथ-साथ देश के लिए एक गौरव के क्षण है। इस खिलाड़ी से दूसरे युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी। इस खिलाड़ी के कारण आज उनका सिर फर्क के साथ ऊंचा हुआ है। इस खिलाड़ी को सरकार की तरफ से जल्द ही अर्जुन आवार्ड से भी सम्मानित किया जाए। सुरेंद्र ने भी इस मुकाम तक पहुंचने का पूरा श्रेय प्रशिक्षक गुरविंद्र सिंह को दिया। उसने पेरिस ओलंपिक में मेडल हासिल करने के रूप रेखा तैयार कर ली गई है। फिलहाल छह महीने के बाद कुरुक्षेत्र पहुंचे है और अब घर जाकर अपने माता-पिता से मिलुंगा और लड्डू खाऊंगा। वहीं अर्जुन अवार्डी दलेल सिंह ने कहा कि 41 सालों के बाद देश को हॉकी में कांस्य पदक मिला है। यह एक बहुत बडी उपलब्धि है। इस उपलब्धि में कुरुक्षेत्र के सुरेंद्र का अहम योगदान रहा है। इस खिलाड़ी से युवा खिलाडिय़ों को प्रेरणा मिलेगी। इस मौके पर डीआईपीआरओ डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ.सुशील टाया, नीरज तंवर, कृपाल सिंह तंवर, जसबीर सिंह वडैच, सुधीर दहिया, प्रवीण कुमार, सुदेश शर्मा, राजविंद्र कौर सहित अन्य मौजूद रहे।
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