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पराली जलाने पर सख्ती : इस्माईलाबाद क्षेत्र में हुई पहली एफआईआर

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कुरुक्षेत्र। धान कटाई सीजन में खेतों में फसल अवशेष जलाने को लेकर प्रशासन और सख्त हो गया है। अब किसानों से जुर्माना वसूल नहीं किया जाएगा बल्कि सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। ऐसे में किसानों को फसल अवशेष जलाने भारी पड़ेंगे। प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए इस्माईलाबाद क्षेत्र में एक किसान पर शनिवार को एफआईआर दर्ज भी करवा दी गई है।
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अभी तक जिले में हरसेक के जरिए ही 90 जगहों पर फसल अवशेष जलाए जाने की सूचनाएं प्रशासन को मिल चुकी हैं, जिनमें से 58 जगहों को ट्रेस भी कर लिया गया है तो वहीं कई जगहों पर सूचनाएं सही नहीं पाई गई। वहीं शनिवार को इस्माईलाबाद क्षेत्र में एक जगह पर फसल अवशेष जलाए जाने का मामला ट्रेस किया गया, जहां संबंधित किसान पर उक्त कार्रवाई की गई। उधर, अभी तक प्रशासन ट्रेस किए गए मामलों के चलते एक लाख 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा चुका है। वहीं प्रशासनिक टीमें भी अपने स्तर पर ये मामले ट्रेस कर रही है, जिसके चलते भी कई किसानों पर जुर्माना वसूल किए जाने की कार्रवाई की जा चुकी है। उधर कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि किसानों को फसल अवशेष जलाने बंद करने ही होंगे। अब जुर्माने की बजाय एफआईआर दर्ज कराए जाने के आदेश मिले हुए हैं। इसी के चलते पहली एफआईआर दर्ज भी की जा चुकी है।



वसूल किए जुर्माने के लिए प्रशासन पसोपश में, ली जाएगी कानूनी राय
फसल अवशेष जलाने पर प्रशासन अभी तक संबंधित किसानों पर जुर्माना ही करता रहा है तो एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी जाती रही। अब एफआईआर दर्ज करने के आदेश मिले तो वहीं यह भी माना जा रहा है कि नए आदेश भी गत 15 सितंबर से लागू माने जाएं। ऐसे में प्रशासन अब तक 57 मामलों में किसानों से जुर्माना वसूल कर चुका है तो इस पसोपेशमें भी है कि आखिर इन किसानों पर एफआईआर की कार्रवाई कैसे की जाए। न जुर्माना लौटाने की स्थिति बन पा रही और न जुर्माना लिए जाने के चलते अब एफआईआर ही प्रशासन करवा पा रहा। उधर जिला उपायुक्त राजेश जोगपाल का कहना है कि जिन किसानों से जुर्माना लिया जा चुका है, उन पर एफआईआर दर्ज करने को लेकर कानूनी राय ली जाएगी, जिसके अनुसार ही अगला कदम उठाया जाएगा।
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नहीं थम रहे पराली जलाने के मामले, शाम ढलते ही छा जाता है धुएं का गुबार
बाबैन। प्रदेश सरकार व प्रशासन भले ही फसल अवशेषों में आग लगाने पर रोक को लेकर कड़े प्रयास कर रहा है। इसके तहत किसानों को जागरूक किया जा रहा है तो वहीं जुर्माना व कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। इसके बावजूद फसल अवशेष जलाने के मामले थम नहीं रहे हैं। इसे किसानों की मजबूरी कहें या लापरवाही कि शाम ढलते ही फसल अवशेषों में आग लगाए जाने के चलते धुएं का गुबार उठने लगते है। यहां तक कि सड़कों से गुजरते लोगों को आंखों में जलन होने लगती है तो दमा के मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। उधर खंड कृषि अधिकारी शशिकांत ने कहा कि अब भी कुछ किसान अपनी मनमानी करते हुए फसल अवशेष जला रहे हैं। ऐसे किसानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो किसान पराली को नहीं जलाएंगे उन्हें सरकार द्वारा प्रति एकड़ एक हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान है।
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