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आत्महत्या रोकने के लिए सामाजिक मदद जरूरी

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राजकीय कॉलेज पलवल में जागरूकता शिविर को संबोधित करती डॉ. सरोज। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। दुनिया भर में हर साल सात लाख से अधिक लोग विभिन्न हालात में आत्महत्या कर लेते हैं, जो बेहद सोचनीय है। ऐसे कदम उठाने से बचाने के लिए हमें एक दूसरे को सामाजिक तौर पर मदद करनी चाहिए। यह आह्वान मनोवैज्ञानिक एवं सिविल अस्पताल में कार्यरत डॉ. सरोज बाला ने किया। वे राजकीय कन्या महाविद्यालय पलवल के मनोविज्ञान विभाग व परामर्श केंद्र लेटस-टॉक के आत्महत्या रोकथाम जागरूकता शिविर में बतौर मुख्यातिथि बोल रही थीं।
उन्होंने कहा कि हमें अपनी आलोचना सुनने की भी आदत होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि तीन मूल मंत्रों आस्क, केयर और एस्कॉर्ट को अपनाकर हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए, जिससे मानसिक स्वास्थ्य ठीक रह सके और आत्महत्या जैसे अपराध से बचा जा सके । कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. पूनम बागी ने बताया कि विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की शुरुआत 2003 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रीवेंशन ने की थी। जिसमें यह संदेश दिया गया कि आत्महत्या जैसे अपराध को रोका जा सकता है।
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कार्यकारी प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी ने विद्यार्थियों को आत्महत्या रोकने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने भविष्य में भी मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कार्यशाला और शिविर का आयोजन करने की जिम्मेदारी मनोविज्ञान विभाग को दी ताकि छात्राओं को अधिक से अधिक मानसिक रुप से स्वस्थ बनाकर स्वच्छ और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें। इस मौके पर समाजसेवी कर्ण सिंह अनिल कुमार, छात्रा जशनजोत, नेहा, दीक्षा, आरजू ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। बीरेंद्र कौर, डॉ सीमा पांडे, डॉ. श्रेष्ठा मुराल, सीमा, डॉ. सपना आदि मौजूद रहे।
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