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अनुशासन का ग्रंथ है शिवपुराण

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कथा सुनाते पंडित भारत भूषण। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। श्री मारकंडेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीरांजी में शनिवार को शिव पुराण की कथा में व्यासपीठ पर डॉ. निरंजन गुप्ता, कंचन गुप्ता और उनके परिवार ने पूजन किया। पूर्व अखिल भारतीय श्री मार्कंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी ने सावन महीने में शिव पुराण की कथा, भगवान शिव पूजन और शिवलिंग पर अभिषेक का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि शिवपुराण अनुशासन का ग्रंथ है।
उन्होंने बताया कि सावन के महीने में शिव पुराण को पढ़ना और सुनना बहुत ही पुण्यदायी होता है। शिव पुराण हमें अनादि भगवान शिव की संपूर्ण कथा बताता है। सृष्टि के उद्भव से पहले से लेकर कलयुग के अंत के बाद तक की सभी कथाएं दो युगों के छोर भगवान शिव से जुड़ते हैं अर्थात शून्य से शून्य तक, शिव महापुराण शिवलिंग के प्राकट्य का वर्णन करता है। शिव पुराण ही हमें बताता है कि महाशिवरात्रि पर शिव पहली बार सृष्टि में ज्योतिर्लिंग रूप में अवतरित हुए थे।
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कथावाचक भारत भूषण ने बताया कि शिव पुराण 18 पुराणों में से एक है, जिसमें भगवान शिव की लीला, कथा और उनकी पूजा विधि के साथ-साथ शिवलिंग की उत्पत्ति और शिव भक्ति से जुड़ी कथाएं हैं। महादेव शिव अपने सच्चे भक्तों के लिए हमेशा हृदय में रहते हैं। वे मात्र फूल-पत्ते चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं। महादेव को भोलेनाथ भी कहा जाता है, क्योंकि भगवान शिव किसी में कोई भेद नहीं करते हैं। शिव पुराण में बताया गया है कि जो व्यक्ति बुद्धि भ्रष्ट हो जाने से परस्त्रीगामी हो जाते हैं उन्हें घोर नरक में जाना पड़ता है। इस अवसर पर स्वामी सीताराम, स्वामी संतोषानंद, स्वामी अमर दास, मयूर गिरि, नाजर सिंह, रविंद्र सैनी, दलजीत सिंह, बिल्लू पुजारी आदि मौजूद रहे।
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