कुरुक्षेत्र। श्रावण मास में केयू नॉन टीचिंग क्लब में प्रवचन कार्यक्रम हुआ। श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के संस्थापक अनिल शास्त्री ने भगवान गणेश के विवाह की कथा सुनाई। शास्त्री ने बताया कि भगवान गणेश एकदंत कहलाए। उनके इस रूप के कारण कोई उनसे विवाह को तैयार नहीं था। इससे नाराज होकर गणेश देवताओं के विवाह में बाधा डालने लगे। देवताओं की समस्या पर ब्रह्मा ने अपनी पुत्रियों ऋद्धि और सिद्धि को गणेश के पास भेजा। दोनों ने प्रश्नों से गणेश का ध्यान भटकाया, जिससे देवताओं के विवाह निर्विघ्न हुए। बाद में ब्रह्मा ने ऋद्धि और सिद्धि के विवाह का प्रस्ताव गणेश के सामने रखा। गणेश की स्वीकृति के बाद उनका दोनों से विवाह हुआ। विवाह के बाद उन्हें शुभ और लाभ नामक पुत्रों की प्राप्ति हुई।