फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मन की अनुभूतियों को हिंदी में किया साझा

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कुरुक्षेत्र। हिंदी आचरण, व्यवहार एवं संस्कार की भाषा है। किसी भी देश की संस्कृति उसकी भाषा की पहचान होती है। संस्कृति का मूल आधार समाज होता है, जिसका चरमोत्कर्ष साहित्य से होता है। ये विचार केयू के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग की ओर से हिंदी दिवस समारोह में पूर्व अधिष्ठाता प्रो. भीम सिंह ने व्यक्त किए। वे केयू में ‘विश्व में हिंदी का विकास’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि भाषा में शुद्धता का होना बहुत आवश्यक है।
प्रो. दिनेश दधीचि ने कहा कि कोरोना काल में उन्होंने अंग्रेजी की सर्वश्रेष्ठ कविताओं का अपने यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से मातृभाषा हिंदी में अनुवाद करके साहित्य को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाया है। डॉ. उषा लाल ने कहा कि हिंदी में नैतिकता, सामाजिकता एवं शब्दों की भव्यता निहित है। डॉ. शैल तिवारी ने कहा कि व्याकरण हिंदी का ध्येय नहीं पर इसलिए हिंदी नदी का प्रवाह है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने दक्षिण क्षेत्र में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और वर्तमान युग हिंदी का स्वर्णिम युग है। रतनचंद सरदाना ने कहा कि दैनिक जीवन में हिंदी का प्रयोग प्रतिबद्धता एवं नैतिकता के साथ करें। हिंदी जीवन जीने की भाषा है। प्रशस्त्र शास्त्री ने कहा कि हिंदी संपर्क की भाषा है इस भाषा ने आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. कामराज सिंधू ने कहा कि हमें हिंदी को आत्मसात करने एवं अपनी सोच को विकसित करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें