कुरुक्षेत्र, शाहाबाद। शाहाबाद सहकारी शुगर मिल और इसके इथेनॉल प्लांट से आसपास के जन जीवन को कोई खतरा नहीं है। मानकों के तहत ही मिल और इथेनॉल प्लांट का संचालन किया जा रहा है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने भी इसे माना है।
प्लांट से लगते यारी गांव के सरपंच गुरदीप सिंह की शिकायत पर एनजीटी की ओर से गठित ज्वाइंट कमेटी द्वारा की गई जांच के बाद अदालत ने शिकायत का निपटारा करते हुए 25 जनवरी को इस संबंध में आदेश जारी किया है, जिसके बाद शुगर मिल प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।
गौरतलब है कि सरपंच गुरदीप सिंह ने शुगर मिल प्रशासन के खिलाफ जिला उपायुक्त और एनजीटी सहित अन्य जगहों पर शिकायत दी थी। एनजीटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला उपायुक्त की अगुवाई में केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ज्वाइंट कमेटी बनाई थी। साथ ही जिला सिविल सर्जन को भी पानी की गुणवत्ता सहित अन्य जरूरी जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद ज्वाइंट कमेटी आठ जनवरी को जांच करने के लिए मौके पर पहुंची थी, जहां पाया गया कि मिल में प्रदूषण व अवशेष निस्तारण के सभी मानकों का ध्यान रखा गया है। इसका पूरा विवरण एचएसपीसीबी के साथ-साथ सीपीसीबी के सर्वर पर भी लगातार प्रदर्शित मिला।
बॉयलर से निकलने वाली राख का निपटान इकाइयों द्वारा किया जा रहा था। स्टैक उत्सर्जन के नमूने एकत्र किए गए और विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, पैरामीटर निर्धारित सीमा के भीतर पाए गए। इथेनॉल इकाई ने अपशिष्ट उपचार संयंत्र के लिए पर्याप्त व्यवस्था की थी और उपचारित अपशिष्ट को उपचार के बाद पुन: उपयोग किया जा रहा था। वहीं, सीएमओ ने भी जांच रिपोर्ट में कहा कि आस-पास के गांवों में किसी विशिष्ट बीमारी का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है। ऐसे में अब एनजीटी ने इस मामले का निपटारा कर दिया है।
शिकायत में ये थे मुख्य आरोप
- चीनी मिल और इथेनॉल प्लांट पर्यावरण मानदंडों का पालन नहीं कर रहे हैं।
- इकाईयां धुआं छोड़ रही हैं और काली फ्लाई ऐश पैदा कर रही हैं।
- इकाईयां उचित उपचार के बिना औद्योगिक अपशिष्टों को खुले में बहा रही हैं, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा है।
- दूषित पानी का उपयोग ग्रामीणों द्वारा पीने के लिए किया जाता है।
सभी नियमों का गंभीरता से हो रहा पालन : एमडी
शुगर मिल के एमडी राजीव प्रसाद का कहना है कि वर्ष 1984 से स्थापित इस मिल में सभी नियमों का गंभीरता से पालन किया जा रहा है। मिल में काम कर रहे कर्मचारियों से लेकर आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर किसी भी प्रकार से विपरीत असर न पड़े, यह विशेष तौर पर ख्याल रखा जाता है। एनजीटी की ओर से दिए गए आदेश में भी स्पष्ट है कि सभी नियमों का पालन हो रहा है। यही कारण है कि शुगर मिल अब तक राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर करीब 30 पुरस्कार जीत चुका है। इस बार भी हाल ही में 25 नवंबर को प्रदेश की सहकारी मिलों में सर्वाधिक गन्ना पेराई व शुगर रिकवरी में प्रदेश का सर्वाेच्च अवार्ड मिला है।