प्रदेश के गुरुद्वारों के संचालन को लेकर शुरुआत से ही कुरुक्षेत्र केंद्र बना रहा। हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जीत लिए जाने के बाद अब यहीं मुख्यालय बनाए जाने की चर्चा की जाने लगी है, लेकिन शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर ने भी यहीं से प्रदेश के गुरुद्वारों का संचालन किए जाने का फैसला लिया था, जिसके लिए 12 साल पहले 12 अक्तूबर 2010 को तत्कालीन प्रधान जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ ने गुरुद्वारा पहली पातशाही के समीप प्रदेश का सब ऑफिस बनाए जाने के लिए नीवं पत्थर भी रखा था। हालांकि यह सब ऑफिस हरियाणा की अलग कमेटी बनाए जाने को लेकर तेज हुए संघर्ष के चलते बन नहीं पाया, लेकिन यह नींव पत्थर आज भी लगा है।
शीर्ष अदालत द्वारा हरियाणा के गुरुद्वारों के प्रबंधन को लेकर एचएसजीपीसी के हक में फैसला आया तो प्रदेश के सिखों में एकाएक हलचल भी बढ़ गई। सिख नेता एवं हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष बलजीत सिंह दादूवाल व इस कमेटी के संस्थापक एवं पूर्व अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं। हालांकि अभी गुरुद्वारों व इनसे जुड़ी अन्य संस्थाओं का संचालन किसके हाथ होगा, यह अभी संशय बना हुआ है, लेकिन यह चर्चा स्पष्ट होने लगी है कि प्रदेश कमेटी का मुख्यालय कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारा छठी पातशाही में ही होगा। यहीं से पूरे प्रदेश के गुरुद्वारों व इनसे जुड़े संस्थानों का संचालन किया जाएगा। इससे पहले एचएसजीपीसी का मुख्यालय कैथल जिला के चीका स्थित गुरुद्वारा छठी, नौंवी पातशाही से चलाया जा रहा था।
बता दें कि प्रदेश में अलग कमेटी बनाए जाने को लेकर वर्ष 2001 में कुरुक्षेत्र में संघर्ष की नींव रखी गई थी। यहीं पर 20 सदस्यों की अहम बैठक हुई थी, जिसमें आंदोलन की रणनीति तय की गई थी। इसके बाद पूरे प्रदेश में अलग कमेटी को लेकर प्रचार शुरू हो गया था तो वर्ष 2004 में कमेटी का चुनाव भी कराया गया। उस समय तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा के नेतृत्व में कड़ा संघर्ष किया जाता रहा।
तीन दिन पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के हक में फैसला दिया तो एकाएक ही प्रदेश भर के सिखों का रुख कुरुक्षेत्र की ओर हो गया। यहां गुरुद्वारा छठी पातशाही में हलचल दिखाई देने लगी तो उसी दिन हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष बलजीत सिंह दादूवाल व पूर्व अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा भी पहुंच गए थे। दोनों ही यहां सदस्यों व अन्य सिखों के साथ चर्चा की तो वहीं अलग-अलग पत्रकारों से भी बातचीत की। ऐसे में अब फिर कुरुक्षेत्र सिख समाज के गुरुद्वारों के संचालन को लेकर केंद्र बन चुका है।