हरियाणा प्रदेश के लिए अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी का बीज कांग्रेस ने अपने शासनकाल में बोया था, जिसे भाजपा ने सत्ता में आने पर प्रफुल्लित किया। यह 100 साल से भी ज्यादा पुरानी एसजीपीसी और सिख समाज को कमजोर करने का प्रयास था।
ये आरोप एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंद्र सिंह धामी ने लगाए। वे यहां शनिवार को डेरा कार सेवा गुरुद्वारा में आयोजित गुरुग्रंथ साहिब प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में एसजीपीसी की ओर से आयोजित समागम में पहुंचे थे। उन्होंने यहां माथा टेकने के बाद संगत को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संगत के बीच हरियाणा कमेटी के बनने से लेकर इससे संबंधित विवाद पर भी खुलकर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि सिख कौम हमेशा मजबूत रही है, जिसे कमजोर करने की साजिश होती रही है। अलग कमेटी बनाने को लेकर सिखों को लड़वाने का प्रयास किया गया, लेकिन एसजीपीसी की ओर से इस संबंध में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया। आज भी सिख पहले की तरह ही मजबूत हैं।
उन्होंने कहा कि अब हरियाणा सरकार ने एचएसजीपीसी चुनाव प्रक्रिया शुरू की हुई है, जिसके लिए अधिक से अधिक लोगों को वोट बनवाने चाहिए, ताकि अपनी ताकत दिखाई जा सके। वोट बनाने के बाद चुनाव का लान होने पर अगले अहम निर्णय लिए जाएंगे। इस दौरान वरिष्ठ उपप्रधान बलदेव सिंह कैमपुर, शिरोमणी अकाली दल नेता शरणजीत सिंह सोथा, धर्मप्रचार कमेटी के सदस्य तेजेंद्र पाल ढिल्लो, हरभजन सिंह मसाना, बलदेव सिंह ओगरा सहित अन्य सिख नेता भी मौजूद रहे।
हमारा कोई झगड़ा नहीं, आज भी गिले शिकवे दूर करने को तैयार
धामी ने हरियाणा कमेटी पर चर्चा करते हुए कहा कि एसजीपीसी का उनके साथ कोई झगड़ा नहीं है। अपने-अपने गिले शिकवे दूर कर एक होने को आज भी तैयार हैं। एचएसजीपीसी प्रधान भूपिंद्र सिंह असंध को श्री अकाल तख्त साहिब पर जाकर समर्पण कर कौम के बीच एकता दिखानी चाहिए। सरकारों के इशारे पर कमेटी नहीं चल सकती। पहले महाराष्ट्र, बिहार व दिल्ली में हुआ और उसी तर्ज पर हरियाणा की कमेटी का हस्र हुआ है। सरकार के हस्तक्षेप से ऐसी कमेटी नहीं चल सकती।
अगले एक साल में मिलेगा मेडिकल कॉलेज
धामी ने कहा कि एसजीपीसी ने हरियाणा के सिख संस्थानों के विकास के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। इन्हीं प्रयासों के चलते ही शाहाबाद में मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान संचालित है, जहां आठ करोड़ रुपये हर साल खर्च किए जाते हैं। यहां मेडिकल कॉलेज बनाने की योजना भी सिरे चढ़ चुकी थी, लेकिन कलह के चलते आगे नहीं बढ़ सकी। अब कोई कलह नहीं हुआ तो अगले एक साल में यह कॉलेज बनाने का काम पूरा हो जाएगा, जिसमें 100 सीटें होंगी।
कनाडा विवाद से सिखों को बड़ा नुकसान
हरजिंद्र सिंह धामी ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि भारत-कनाडा के बीच उपजे विवाद के सिखों को बड़ा नुकसान हुआ है, क्योंकि कनाडा में बड़े स्तर पर सिख गए हुए हैं। उन्होंने कहा कि वहां के प्रधानमंत्री द्वारा लगाए आरोपों को भारत सरकार ने गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाने चाहिए। खालिस्तानी समर्थकों के ठिकानों पर छापेमारी को लेकर धामी ने कहा कि यह सरकार का काम है।