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Kurukshetra News: अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी में सात विदेशी और 18 भारतीय विशेषज्ञ करेंगे गीता के संदेश पर मंथन

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कुरुक्षेत्र। कुुवि के थर्ड गेट के बाहर का दृश्य। संवाद
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कुरुक्षेत्र। “वसुधैव कुटुंबकम” भारतीय दर्शन में अंतर्निहित एक गहन अवधारणा है, जिसका अर्थ है कि समस्त विश्व एक परिवार है। यह शाश्वत दर्शन इस विचार का प्रतीक है कि भौगोलिक, सांस्कृतिक अथवा धार्मिक मतभेदों के होने पर भी समस्त मानवता परस्पर संबंधित तथा एक- दूसरे पर आश्रित है। भगवद्गीता इस अवधारणा को समझने और वैश्विक एकता को प्रोत्साहन देने के लिए आधारशिला के रूप में कार्य करती है। अब विभिन्न देश गीता के इस संदेश के मर्म को भी समझते हुए इस पर आगे बढ़ने लगे हैं। इसी पर मंथन करने के लिए विभिन्न देशों के विशेषज्ञ व शोधकर्ता 17 दिसंबर से जुटेंगे।
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यह मौका होगा अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के चलते कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में होने वाली अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी का, जिसका थीम भी वसुधैव कुटुंबकम श्रीमद्भगवदगीता एवं वैश्विक एकता रखा गया है। इस विषय पर न केवल अमेरिका, कनाडा, जापान सहित सात देशों के विशेषज्ञ जुड़ेंगे बल्कि कई देशों के मुस्लिम, सिख व अन्य धर्माें से जुड़े विशेषज्ञ व शोधकर्ता भी इसके लिए उत्साहित है। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। संगोष्ठी के दौरान होने वाले इस मंथन में भारत के भी 18 गीता विशेषज्ञ जुड़ेंगे, जिनमें संत समाज के लोग भी शामिल होंगे। हाल ही में दिल्ली में हुए जी-20 सम्मेलन में भी “वसुधैव कुटुंबकम”थीम रख गया था। अब कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने भी इसे आगे बढ़ाने की बड़ी पहल की है।


विदेशों से ये होंगे मुख्य वक्ता
टोक्यो से हिरोइकि सातो, उत्तरी कैलिफोर्निया से जैफरी आर्मस्ट्रांग, सत्या कालरा, वाशिंगटन के डॉ. नरेंद्र, न्यूयॉर्क के डॉ. वेनू, कैलिफोर्निया से सुनील जैन व नेल भट्ट होंगे, जो ये वक्ता विदेशी धरा से ही गीता का ज्ञान युवाओं तक पहुंचाएंगे और युवाओं को गीता के राह पर चलने के लिए प्रेरित करेंगे। इसी के साथ 18 भारतीय वक्ता भी अपने विचार साझा करेंगे।
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जापान के प्रो. सातो गीता पर हिंदी में देंगे व्याख्यान
जापान में टोक्यो के मुसाशिनो विश्वविद्यालय के प्रो. हिरोउकि सातो 18 दिसंबर को गीता पर हिंदी में व्याख्यान देंगे। वे अपने शोध को युवाओं के साथ साझा करने के लिए विशेष तौर पर संगोष्ठी में पहुंच रहे हैं। उनके शोध का विषय भारतीय दर्शन और भारतीय साहित्य है। वह भारतीय दर्शन के बारे में भी युवाओं के समक्ष वक्तव्य रखेंगे।

ये 18 भारतीय विशेषज्ञ देंगे व्याख्यान
संगोष्ठी में सात विदेशी और 18 भारतीय विशेषज्ञ गीता पर व्याख्यान देंगे। इसमें अपने देश के विभिन्न उच्च संस्थानों के विशेषज्ञ युवाओं को गीता के राह पर चलने के लिए प्रेरित करेंगे, जिसमें स्वामी ज्ञानानंद, डाॅ. सी उपेंद्र रावत, प्रो. सुधीर कुमार, प्रो. वीरेंद्र के अलंकार, प्रो. सैय्यद तारिक मुर्तजा, प्रो. अभिमन्यु सिंह, डॉ. अनिल करवंदे, डाॅ. अमरजीत सिंह, प्रो. एसके गर्ग, डॉ. मंजू मेहता, प्रो. आशा क्वातरा, प्रो. ओजेश प्रताप सिंह, डॉ. राजेंद्र केलकर, सनहिता नंदि, डॉ. जितेंद्र कौर गुलाटी, डॉ. कंवल प्रीत, प्रो. रविप्रकाश आर्य और प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री मुख्य वक्ता रहेंगे।

17 दिसंबर को संगोष्ठी का उपराष्ट्रपति करेंगे उद्घाटन
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी का शुभारंभ 17 दिसंबर को होगा, जिसका उद्घाटन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ करेंगे। दूसरे सत्र में श्रीमद्भगवद् गीता और युवा पर व्यावहारिक कार्यशाला आयोजन किया जाएगा, उसके बाद गीता संसद के माध्यम से देश और विदेश के विशेषज्ञ गीता पर मंथन करेंगे। संगोष्ठी के दूसरे दिन 18 दिसंबर को गीता पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और उसके बाद शोधार्थी अपने शोध साझा करेंगे।


15 देशों से संपर्क में कुवि
कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि संगोष्ठी में भागीदार बनाने के लिए भारतीय केंद्रित संस्कृत, इंडोलॉजी की पढ़ाई कराने वाले जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, इंडोनेशिया व जर्मनी सहित 15 देशों से संपर्क स्थापित किया गया है। इनमें से अधिकतर ने गहन रुचि दिखाई है। प्रयास है कि विश्व स्तर तक गीता का संदेश पहुंचे। जी-20 सम्मेलन से प्रेरित होकर उन्होंने इस संगोष्ठी का आयोजन किया है।

कुरुक्षेत्र। कुुवि के थर्ड गेट के बाहर का दृश्य। संवाद

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