कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के साथ ही शिल्प व सरस मेला भी रविवार को संपन्न हुआ। जिसके बाद देर रात को ही शिल्पकार अपना-अपना सामान समेटकर पर्यटकों का स्वागत करते हुए एवं अगले साल फिर लौटने के वादे के साथ रवाना हुए। मेले के अंतिम दिन शिल्पकार और कलाकार रुख्सत होने से पहले अपने स्टॉलों और घाटों पर पर्यटकों गर्मजोशी के साथ स्वागत करते नजर आए। आगामी वर्ष में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते 11 दिसंबर को दीपदान की संभावना है।
महोत्सव में देश व प्रदेश के कोने-कोने से सांस्कृतिक कलाकारों व शिल्पकारों ने भाग लिया। यहां के लोगों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम देखकर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। ठंड का मौसम होने के बावजूद रोजाना पर्यटकों व श्रद्धालुओं ने इस महोत्सव में आकर जमकर खरीदारी की। जिला उपायुक्त शांतनु शर्मा ने सभी का आभार जताया।
अभिनेत्री भाग्यश्री सहित विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने दिखाए कला के रंग
महोत्सव में पार्टनर कंट्री श्रीलंका व पार्टनर स्टेट असम के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने सात दिसंबर से 24 दिसंबर तक मुख्य मंच, हरियाणा व असम पवेलियन, सांस्कृतिक संध्या, ब्रह्मसरोवर के घाटों पर रोजाना सांस्कृतिक प्रोग्राम प्रस्तुत कर पर्यटकों का मनोरंजन किया। इसके अलावा 48 कोस के 164 तीर्थों पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों व जिला स्तरीय कार्यक्रमों में भी अपनी प्रस्तुति दी है। इस महोत्सव में जहां आरती स्थल पर संध्या के समय विभिन्न नामी कलाकार अपने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। वहीं इसके साथ-साथ मुख्य पंडाल में सांध्यकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी अभिनेत्री भाग्यश्री, गजेंद्र फौगाट, महावीर गुड्डू, नितिश भारद्वाज, अभिवंदन, रंजू प्रसाद, एसएस प्रसाद आदि ने अपने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। इसके साथ-साथ हरियाणा व असम पवेलियन में हरियाणा और असम की सांस्कृतिक विरासत के झरोखों को भी देखने का सुनहरा अवसर मिला।
हजारों सूचनाओं से मिला पर्यटकों को फायदा
जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा स्टाल नंबर एक पर बनाए गए सूचना केंद्र पर सात दिसंबर से 24 दिसंबर तक हजारों सूचनाएं देकर बिछड़ों को मिलाने, खोए हुए बच्चों को अभिभावकों से मिलाने, स्कूलों के विद्यार्थियों के साथ-साथ खोए हुए सामान व अन्य मामलों का निपटारा करने का काम किया गया। इस सूचना केंद्र की कमान खंड प्रचार कार्यकर्ता मनोज कुमार, बरखा राम, कृष्ण लाल, राजेंद्र आदि ने संभाली हुई थी।
नगाड़ा पार्टी, बहरूपिए व कच्ची घोड़ी रही आकर्षण का केंद्र
सांस्कृतिक कलाकारों के अलावा नागाड़ा पार्टी, राजस्थान के बहरूपिए व कच्ची घोड़ी के साथ-साथ पंजाब से आए बाजीगर ग्रुप भी महोत्सव में आकर्षण का केंद्र रहे। बांस के डंडों को पैरों से बांधकर लंबू बने कलाकारों ने जहां बच्चों का खूब मनोरंजन किया, वहीं विभिन्न स्थानों पर बनाए गए सेल्फी प्वाइंट पर सेल्फी खींचने का पर्यटकों में खूब क्रेज दिखा।