कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार के महंत राजेंद्र पुरी ने श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज से मुलाकात कर सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार एवं सुरक्षा पर गहन चर्चा की। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि भारत और सनातन धर्म पर बढ़ते खतरे अब छिपे नहीं हैं। सांस्कृतिक जड़ों, वैदिक परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को बचाने का समय आ गया है। अब केवल चर्चा का नहीं, ठोस कदम उठाने का समय है। संत-महापुरुषों को समाज को जागरूक करने के साथ-साथ स्वयं आगे आकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि आज का पढ़ा-लिखा सनातनी परिवार, नौकरी और सुख-सुविधाओं में इतना व्यस्त है कि धर्म, समाज और राष्ट्र के लिए सोचने का समय ही नहीं बचता। समाज को जगाना होगा और इसके लिए मजबूत प्रयास करने होंगे।महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने कहा कि चल रहा अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव जागरूकता का सबसे उचित अवसर है। श्रीमद्भागवत गीता सनातन धर्म का सबसे प्रचंड प्रकाश-स्तंभ है। योगेश्वर श्रीकृष्ण के स्वरूप को सही रूप में समझकर गीता के मार्ग, यज्ञ, दान और तप के मार्ग पर लौटना होगा। विश्व शांति और मानवता की रक्षा का एकमात्र रास्ता श्रीमद्भागवत गीता ही है। दोनों संतों ने सनातन समाज से एकजुट होकर धर्म और राष्ट्र रक्षा में सक्रिय योगदान देने की अपील की।