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संतों और पुरोहितों ने देखी ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म

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पत्रकारों से बातचीत करते महंत बंसीपुरी व अन्य। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। मठ मंदिर अखाड़ों के संत और पुरोहितों ने अपने सेवकों के साथ बुधवार को सिनेमा में द कश्मीर फाइल्स फिल्म देखी। संतों का कहना है कि ये तो 1990 में कश्मीर के हिंदुओं पर हुए जघन्य अत्याचार व पलायन की आधी अधूरी कहानी के कुछ अंश ही हैं।
फिल्म देखने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्वामी बंसीपुरी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार से कश्मीरियों पर जुल्म हुए हैं, सरकार को अब उन्हें फिर विस्थापित करने का काम करना चाहिए। स्वामी अनूप गिरी ने कहा कि फिल्म में दिखाया गया कि किस प्रकार से एक विशेष समुदाय के धार्मिक स्थल से हिंदू समाज के खिलाफ प्रचार होता था, लेकिन सनातन धर्म मे मंदिरों से कभी भी ऐसा दुष्प्रचार नहीं हुआ।
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कश्मीर विस्थापित अशोक जाड ने बताया कि फिल्म में जो दिखाया गया वो जुल्मों का दस प्रतिशत भी नहीं है। उनके जुल्मों को देखकर हमारी आंखों से खून के आंसू निकलते हैं, हम उनके जुल्मों के चश्मदीद गवाह हैं। इस अवसर पर स्वामी रोशन पुरी, अनूप गिरी, स्वामी हरिओम दास परिवर्जक, वासुदेवानंद, विशालमनी ,महात्मा दिव्यानंद, जगन्नाथ पुरी, रोहित कौशिक, कथावाचक सुखदेव आचार्य, पुजारी सुशील तिवारी, एमके मोदगिल, जयपाल शास्त्री, प्रमोद कौशिक, हरीश शर्मा, सुरेश जोशी, विजेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
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