कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार में सनातन परंपरा के द्योतक अनुष्ठान विषय पर शनिवार को महंत राजेंद्र पुरी के मार्गदर्शन में धर्मचर्चा हुई। बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं ने आस्थापूर्वक प्रवचन कार्यक्रम में भागीदारी निभाई। पूजन के बाद महंत ने कहा कि पूजा ध्यान, समर्पण और आदर्शों को बढ़ावा देती है। उन्होंने पूजा पाठ और अनुष्ठान इत्यादि का समाज में वैदिक रूप से महत्व बताया। महंत पुरी ने कहा कि सनातन परंपरा में पूजा-पाठ और अनुष्ठान केवल कर्मकांड नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। मनुष्य के भौतिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। यह परमात्मा से जुड़ने, आत्म-शुद्धि और आंतरिक शांति का साधन है। सनातन परंपरा में पूजा के महत्व के मुख्य बिंदु हैं, आध्यात्मिक विकास और शांति। दैनिक पूजा से मन को शांति मिलती है, तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है। पूजा से व्यक्ति के आत्मविश्वास और भक्ति में वृद्धि होती है। समर्पण भावना व्यक्ति को आत्मा के साथ संवाद में ले जाती है। ध्यान और चिंतन का अभ्यास होता है, जो आत्मा को शांति और सुख देता है। सनातन धर्म के अनुसार पूजा में समर्पण की भावना आत्मा को धार्मिक साधना के माध्यम से प्राप्त होती है। इस अवसर पर डाॅ. एसके गोस्वामी, डाॅ. रंजना, अंकुश, ऋतिका, मनीषा, हरदीप, जगतार, मनमोहन, श्वेता, हरदयाल, जयंत, विजय, अजय, अक्षय और मनप्रीत सहित अन्य मौजूद रहे।