कुरुक्षेत्र। हमारा शरीर व्यायाम करने के लिए कितना उपयुक्त है। अपने-अपने स्वास्थ्य के अनुसार हम कितना व्यायाम कर सकते हैं और कितना व्यायाम घटाया व बढ़ाया जाना चाहिए। अस्वस्थ होने पर व्यायाम का विपरीत असर न पड़े और किसी प्रकार के हादसे से बचा जा सके। इसके लिए हमें अब स्मार्ट जिम्नेजियम के जरिए हर प्रकार की जानकारी मिल सकेगी। यह नया शोध एनआईटी कुरुक्षेत्र के डॉ. संदीप कुमार सूद और डॉ. मुनीष भाटिया ने किया किया, जिसमें उपकरण को लेकर मेथोडोलॉजी तैयार की गई और हाल ही में इसे पेटेंट भी मिला है। इसको लेकर न केवल एनआईटी परिसर में बल्कि व्यायाम करने वाले लोगों में भी खुशी देखी जा रही है।
अक्सर व्यायाम करने के दौरान कुछ ही मिनट बाद अनेक लोगों की सांस फूलने लगती है और धड़कनें तेज हो जाती हैं, जिसके चलते व्यायाम पूरा करना भी मुश्किल हो जाता है। इसका मूल कारण स्वास्थ्य होता है, जिस वजह से कुछ मिनट का व्यायाम भी शरीर नहीं झेल पाता। इसके पीछे कई लोगाें में हृदय गति, कमजोर श्वसन दर, रक्त शर्करा स्तर सहित कई अन्य बीमारियां होना माना जाता है। कई ऐसी बीमारियां भी होती है, जिनका व्यायाम करने वाले व्यक्ति को पता भी नहीं होता और वे व्यायाम के जरिए शरीर को मजबूत बनाने का प्रयास करते रहते हैं। ऐसे में कई लोग अचानक हादसे का शिकार तक हो जाते हैं लेकिन अब व्यायाम करने के दौरान शरीर के अंदरूनी पार्ट, हार्ट और लंग्स की यथावत स्थिति की रिपोर्ट भी मिल सकेगी और स्वास्थ्य के मुताबिक व्यायाम की गति को कम ज्यादा भी किया जा सकेगा।
ऐसे कार्य करेगा स्मार्ट जिम्नेजियम उपकरण
एनआईटी के कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार सूद और डॉ. मुनीष भाटिया ने बताया कि जल्द ही इस मेथोडोलॉजी पर किसी कंपनी से संपर्क साधकर उपकरण बनाने का कार्य किया जाएगा। उनके मुताबिक व्यायाम करने वाले लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट जिम्नेजियम उपकरण को तैयार किया गया है। ये आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के तीन चरणों में कार्य करेगा। पहले स्वास्थ्य कंट्रोलर जो कि व्यायामकर्ता के स्वास्थ्य को जानेगा, जिसके बाद वह स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए जानकारी देगा। व्यायाम कंट्रोलर के माध्यम से व्यायाम के पैरामीटर को नापेगा और गति को कम ज्यादा करने की सूचना देगा।
ये उपकरण व्यायाम में सेट की संख्या, दोहराव की संख्या और अभ्यासों के बीच देरी का समय भी बताएगा। इसमें स्वास्थ्य के मुताबिक पैरामीटर तय कर सकते हैं। हेल्थ कंट्रोलर में व्यक्ति की हृदय गति, श्वसन दर, रक्त शर्करा स्तर और पसीने की हानि जैसी वास्तविक समय की स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देगा। उसके बाद क्लाउड कनेक्टेड डेटा विश्लेषक है जो कि वास्तविक समय का डेटा विश्लेषण करता है। इसे क्लाउड कनेक्टेड कंप्यूटिंग मॉड्यूल के तौर पर व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए व्यायाम विश्लेषण करने के लिए प्रयोग किया जाएगा।
डॉ. संदीप 25 और डॉ. मुनीश आठ वर्षों से कर रहे शोध
डॉ. संदीप कुमार सूद का 25 वर्षों से अधिक का शोध अनुभव है। अंतरराष्ट्रीय स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय 2022 और 2023 के मुताबिक विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में से हैं। उनके 130 शोध पत्र प्रकाशित किए जा चुके हैं और दो पेटेंट मिल चुके हैं। उन्होंने आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और सिक्योरिटी के क्षेत्र में शोध किया है। डॉ. मुनीश भाटिया का आईओटी, डेटा साइंस और क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में आठ साल से अधिक का शोध अनुभव है। ये भी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के मुताबिक पिछले दो सालों में विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में से एक हैं।
बदलती तकनीक मुताबिक शिक्षकों को शोध के लिए किया जाता है प्रेरित : प्रो. बीवी रमना
एनआईटी निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी का कहना है कि वह बदलती तकनीक के मुताबिक शिक्षकों को शोध करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। अभी तक संस्थान के 50 पेटेंट 400 रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुके हैं। मेथोडोलॉजी के मुताबिक ये उपकरण व्यक्ति के पैरामीटर को रीड करेगा तथा बायो सेंसर के प्रयोग से कार्य करेगा।