संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। हरियाणा सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध प्रदेश रहा है। यहां की सांस्कृतिक विरासत का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। इसी प्रदेश की धरा सरस्वती के तट पर वेदों की रचना हुई। यही वो धरा है जहां पर महर्षि दधीचि ने अपनी अस्थियां दान कर असुरों का संहार किया। यह विचार राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने व्यक्त किए। वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चार दिवसीय रत्नावली महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मुख्यातिथि के तौर पर बोल रहे थे।
केयू में 31 अक्तूबर तक चलने वाले रत्नावली महोत्सव का आगाज संगीत एवं नृत्य विभाग के छात्र-छात्राओं के गणपति वंदना और फिर लूर नृत्य के साथ हुआ। पहले दिन करीब 30 टीमें विभिन्न शिक्षण संस्थानों से पहुंची और हरियाणवी भजन, रागिनी, हरियाणावी साज-सज्जा, हरियाणा पगड़ी व सांग उत्सव जैसी विधाएं भी प्रस्तुत की गई, जिन्हें देख राज्यपाल व अन्य दर्शक गदगद हो उठे।
राज्यपाल ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रत्नावली महोत्सव का अहम योगदान रहा है। इस रत्नावली महोत्सव से युवाओं को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आत्मसात करने का एक अवसर मिलता है और अच्छी शिक्षा और संस्कार भी मिलते हैं। यह महोत्सव निश्चित रूप से प्रदेश सरकार की हरियाणवी संस्कृति के प्रति सोच को अमलीजामा पहनाने का काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा ने आर्थिक विकास, कानुन व्यवस्था व सुशासन के मामले में नई छाप कायम की है। प्रदेश कृषि, शिक्षा, सुरक्षा, सेवा, स्वास्थ्य, सुशासन, खेल, आटो उत्पादन के क्षेत्र में प्रथम स्थान पर है। शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व तरक्की की है। उच्च शिक्षा के लिए वर्तमान में चार दर्जन राज्य व निजी क्षेत्र के विश्वविद्यालय हैं।
मुझे हरियाणवी होने पर गर्व : सतीश कौशिक
रत्नावली महोत्सव में ब फिल्म अभिनेता एवं निदेशक सतीश कौशिक भी पहुंचे और युवाओं के उत्साह को देख गदगद हो उठे। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से बनाई गई नई फिल्म पालिसी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसमें सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इससे हरियाणवी सिनेमा जगत को एक नया मुकाम मिलेगा।
उन्होंने कहा कि वे महेंद्रगढ़ के गांव दनौंदा से बॉलीवुड तक पहुंचे और अपनी जगह बनाई, लेकिन इसके लिए उन्हें कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ा। उन्होंने अनेकों हिंदी फिल्मों में हरियाणवी भाषा को अहमियत दी है और उसे गर्व है कि वह हरियाणवी है। उन्हें अपने गांव, प्रदेश, बोली व संस्कृति पर गर्व है। हर हरियाणवी को ऐसा गर्व होना चाहिए।
केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से रत्नावली महोत्सव का आयोजन कर रहा है। पूरे प्रदेश से तीन हजार युवा कलाकार इस सांस्कृतिक महाकुंभ में भाग ले रहे हैं। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की शुरुआत की है और वर्ष 2025 तक इसे विश्वविद्यालय में पूर्णतया लागू कर दिया जाएगा।
केयू में हरियाणवी लोक कला प्रदर्शनी का शुभारंभ करते राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय साथ में बॉलीवुड- फोटो : Kurukshetra