निजी स्कूलों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने फिर से मोर्चा खोल दिया है। अभिभावकों ने एक निजी स्कूल में आगे टेंट लगाकर धरना दिया और निजी स्कूल प्रशासन व जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान अभिभावकों के साथ स्कूली बच्चे भी मौजूद रहे। अभिभावकों का कहना है कि हमने निजी स्कूल व शिक्षा अधिकारी के समक्ष अपनी जायज मांग रखी थी। वे ऑनलाइन कक्षा के लिए फीस भरने को तैयार हैं, लेकिन एनुअल चार्ज नाजायज है, जिसका हम पहले से विरोध करते आ रहे हैं और आगे भी जारी रहेगा। स्कूल प्रशासन कुछ सुन नहीं रहा। जिला शिक्षा अधिकारी से भी मिले, लेकिन उन्होंने भी कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया। अभिभावकों ने कहा सरकार का नारा है कि सभी शिक्षित हों, लेकिन यहां तो शिक्षा व्यापार बनकर रह गई है। सरकार अभिभावकों की आवाज को सुने और उस पर अमल करें। अभिभावकों ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 18 मई को एक लेटर छह स्कूलों को जारी किया गया था। जिसमें लिखा था कि फीस के चलते किसी भी बच्चे का स्कूल से नाम या ऑनलाइन कक्षा से नाम नहीं काटा जाएगा। अभिभावकों ने कहा कि यह मामला हाई कोर्ट में भी निजी स्कूल तथा अभिभावक एसोसिएशन के बीच चल रहा था, जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी पार्टी बने थे। वह दो बार बुलाने पर भी अपना जवाब नहीं दे पाए और तीसरी हेरिंग से पहले ही अपना लेटर वापस ले लिया। अभिभावकों का कहना है किफी एंड फंड रेगुलेटरी अंबाला तथा हाई कोर्ट में मामला होने के बीच वह ऐसा कैसे कर सकते हैं और मामला कोर्ट में होने के चलते स्कूल बच्चों के नाम कैसे काट सकते हैं। अभिभावकों का कहना है कि जो भी केस का फैसला आएगा वह उसको मानने के लिए तैयार हैं तब तक हमारे बच्चों का नाम आनलाइन कक्षा में जोड़ा जाए।