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Kurukshetra News: किसानों की राजनीतिक हुंकार सियासी दलों के लिए चुनौती

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- जन आक्रोश रैली में किसान नेताओं ने खुलकर की राजनीति में उतरने की वकालत, किसानों से मांगा समर्थन
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- रालोद और सपा ने चुनावों में किसानों को खुला समर्थन देने का किया एलान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। पिपली में किसानों की जन आक्रोश रैली के कई राजनीतिक मायने भी सामने आए। इस रैली के जरिये किसानों नेताओं ने मंच से राजनीतिक हुंकार भरी। इस बात का भी संकेत दे दिया कि वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा व विधानसभा चुनावों में किसान नेता अपने प्रत्याशी भी उतार सकते हैं। ये प्रत्याशी या तो निर्दलीय उतारे जाएंगे या किसी नए राजनीतिक दल के बैनर तले। इसके लिए रैली में पहुंचे रालोद और सपा के नेताओं ने भी किसानों को खुला समर्थन देने की बात कही। किसान यदि अगले साल चुनावी रण में उतरते हैं तो निसंदेह प्रदेश के राजनीतिक दलों के लिए यह एक बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।
किसानों की इस रैली में हरियाणा समेत पंजाब, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के काफी संख्या में किसान मौजूद रहे। रैली में राजनीति के साथ-साथ किसानों से जुड़ीं समस्याओं, मांगों व अन्य मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा कर एकजुटता के लिए आह्वान किया गया।
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उत्तरप्रदेश का रहा दबदबा, टिकैत को भी दिया संदेश
जन आक्रोश रैली में भले ही हरियाणा के विभिन्न जिलों से किसान व अन्य लोग पहुंचे थे, लेकिन मंच पर उत्तरप्रदेश का दबदबा बना रहा। बड़े काफिले के साथ रैली में पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री के पौत्र एवं राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी से लेकर सपा नेता मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव सहित छपरौली के विधायक डॉ. अजय कुमार, विधायक गुरलाल मोहम्मद, सरदाना के विधायक अतुल प्रधान, पूर्व मंत्री डॉ. कुलदीप उज्जवल, मनोज नागर सहित कई अन्य विधायक व किसान नेताओं ने भी संबोधित किया। वहीं राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस रैली के जरिये भाकियू चढ़ूनी गुट ने संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत को भी बड़ा संदेश दिया है। टिकैत इसी अनाजमंडी में सूरजमुखी एमएसपी पर चढूनी की ओर से खरीद को लेकर किए बड़े आंदोलन के दौरान किसानों को संबोधित करने पहुंचे थे। यहीं नहीं वे हरियाणा में अक्सर सक्रिय रहते हैं। इससे पहले दिल्ली में किसान आंदोलन के बाद टिकैत व चढू़नी की राहें जुदा होने के बाद उक्त आंदोलन में वे दोनों पहली बार मंच पर एक साथ दिखे थे।


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रैली की झलकियां
- जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल सिंह मलिक नहीं पहुंचे, जल्द पहुंचने को कई बार किया एलान।
- सुबह नौ बजे ही किसान रैली स्थल पर पहुंचने लगे।
- किसान ढोल, डीजे के साथ ट्रैक्टर-ट्रालियों व अन्य वाहनों पर सवार होकर पहुंचे।
- रैली में महिलाएं भी पहुंची तो महिला विंग प्रदेशाध्यक्ष सुमन हुड्डा व अन्य महिला नेत्रियों ने संबोधित भी किया।
- पूरी तरह से राजनीतिक रूप देते हुए रैली में नेताओं के लिए दो मंच बनाए गए तो सुरक्षा की दृष्टि से ‘डी’ तक बनाई गई।
- टोलियाें में पहुंची महिलाएं, मंचासीन नेताओं के साथ सेल्फी लेने का दिखा क्रेज।
- 20 से ज्यादा नेताओं व पदाधिकारियों ने किया संबोधित।
- किसान यूनियन के वालिंटियरों ने संभाले रखी पूरी व्यवस्था।
- किसानों के पहले के आंदोलन से सबक लेते हुए पुलिस पुख्ता प्रबंधों के साथ भारी संख्या में रही तैनात।
- हर हालात से निपटने के लिए वज्र वाहन से लेकर रोडवेज बसें व अतिरिक्त पुलिस अलर्ट मोड पर रखी गई।
- रैली स्थल पर किसान हुक्का गुड़गुड़ाते रहे, खाने से लेकर चाय, पानी की भी की गई थी व्यवस्था
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