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प्लास्टिक प्रकृति के लिए खतरा

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केयू के यूआईईटी संस्थान में श्रमदान करते विद्यार्थी। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। केयू के यूआईईटी में विद्यार्थियों के लिए चल रहे इंडक्शन कार्यक्रम के तहत प्लास्टिक प्रयोग के विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। रसायन विभाग के प्रो. संजीव अरोड़ा ने कहा कि आजकल आर्थिक नुकसान से बचने के लिए हम अत्यधिक प्लास्टिक का प्रयोग कर रहे हैं। यह हमारे स्वास्थ्य के साथ सभी प्रकार के जीव जंतु ौर प्रकृति को सीधे रूप से प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हम प्लास्टिक को पैकेजिंग के रूप में अत्यधिक प्रयोग कर के बाद उसको खुले में फेंक देते हैं। बड़े-बड़े आयोजनों में प्लास्टिक के बर्तनों का ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसके बाद यह बर्तन कहीं फेंक दिए जाते हैं। इनमें कुछ चटपटा पदार्थ लगा होने के कारण पशु, जीव जंतु खा लेते हैं और जब इंसान उन से बने उत्पाद का इस्तेमाल करता है तो हानिकारक तत्व इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिसके कारण कैंसर जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है।
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विश्वविद्यालय के डीन इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी व यूआईईटी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा ने संस्थान के राष्ट्रीय सेवा योजना का एक दिवसीय शिविर प्लास्टिक फ्री करने के लिए का आयोजन किया गया। शिविर का उद्घाटन करते हुए प्रोफेसर ढींगरा ने कहा प्लास्टिक से चीजें हमारे वातावरण को नुकसान हो रहा है और जिसका सीधा नुकसान मानव को भुगतना पड़ता है।
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हमें जहां भी इस प्रकार की प्लास्टिक के प्लास्टिक के उत्पाद पड़े मिलते हैं उनको समुचित जगह पर निष्पादन चाहिए। इस उद्देश्य के लिए एक दिवसीय एनएसएस कैंप का आयोजन कर रहे हैं। यूआईईटी एनएसएस के संयोजक डॉ. राजेश दहिया व डॉ. सुनील नैन व डॉ रीटा दलाल ने भी अपने विचार रखे । इंडक्शन कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. अमिता मित्तल ने कहा कि हम निरंतर विद्यार्थियों के लिए उनकी कौशल विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर नेहा दुग्गल, रविंद्र चौधरी, शिखा चौधरी, प्रज्ञा, सोनिया, ज्योति, हरिकेश पपोसा आदि उपस्थित रहे।
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