संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जिला पुलिस ने लोकसभा और राज्यसभा में पारित तीन नए विधेयक में नागरिकों को जागरूक किया। पुलिस ने पुलिस लाइन में आयोजित गणतंत्र दिवस पर झांकी निकालकर जागरूक किया। पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह भौरिया ने बताया कि सरकार ने भारतीय दंड संहिता 1860, भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता 1973, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 में सुधार करते हुए तीन नए विधेयक भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता व भारतीय साक्ष्य बिल-2023 बनाए गए है। उनको लोकसभा के बाद राज्यसभा से पारित किया गया है। जल्द ही इन विधेयक, कानून को अमल में लाया जाएगा।
बताया कि यह नए कानून अपराध की रोकथाम में कारगर साबित होंगे। इन कानून को लेकर गणतंत्र दिवस पर झांकी निकालकर आमजन को जागरूक किया गया है। नए कानून में आतंकवादी कृत्य, जो पहले गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम जैसे विशेष कानूनों का हिस्सा थे। इसे अब भारतीय न्याय संहिता में शामिल किया गया है। मॉब लिंचिंग यानी जब पांच या अधिक लोगों का एक समूह मिलकर जाति या समुदाय के आधार पर हत्या करता है, तो समूह के प्रत्येक सदस्य को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी। बताया कि पहले केवल 15 दिन की पुलिस रिमांड दी जा सकती थी, लेकिन अब अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे 60 या 90 दिन तक किया जा सकता है। जांच-पड़ताल में अब फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने को अनिवार्य बनाया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी का अधिक उपयोग करना, जिसमें खोज, बरामदगी की रिकॉर्डिंग, सभी पूछताछ और सुनवाई ऑनलाइन मोड़ में करना शामिल है। एफआईआर जांच और सुनवाई के लिए अनिवार्य समय-सीमा तय की गई है। अब सुनवाई के 45 दिनों के भीतर फैसला देना होगा। अब सिर्फ मौत की सजा पाए दोषी ही दया याचिका दाखिल कर सकते हैं। पहले गैर सरकारी संगठन या नागरिक समाज समूह भी दोषियों की ओर से दया याचिका दायर कर देते थे।
महिला विरुद्ध अपराध के विधेयक में भी बदलाव
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार को लेकर भी कानून में बदलाव किया गया है। नए बिल में सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में अब 20 साल की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास या मृत्यु दंड का प्रावधान किया गया है।